
गोवर्धन मठ, पुरी के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा है कि प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेले में गंगा स्नान करने से रोका नहीं गया था। उन्होंने इस मामले को गलत तरीके से पेश किए जाने की बात कही।
स्वामी निश्चलानंद ने बताया कि प्रशासन ने केवल मेले में भारी भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए सुरक्षा कारणों से रोक लगाई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से रोकने का उद्देश्य किसी प्रकार की असहजता पैदा करना नहीं था।
इससे पहले, 18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को रोक दिया गया था। इस पर उनके शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, शिष्यपालकों द्वारा शिखा पकड़कर घसीटने और मारपीट का आरोप भी प्रशासन पर लगाया गया। इसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरना प्रदर्शन हुआ।
प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिसे उन्होंने प्रस्तुत किया। इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ शब्द का उपयोग करने से विवाद और बढ़ गया, जिसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से की थी।
वर्तमान में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले को छोड़ काशी के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं, शंकराचार्य निश्चलानंद छत्तीसगढ़ में हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत दुर्ग जिले में प्रवचन और जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उनके स्वागत के लिए रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।