
गोरखपुर: उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित गोरखपुर–सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज कर दी गई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी हिमांशु वर्मा ने तहसील सदर के उप निबंधक प्रथम और द्वितीय को आदेश दिया है कि एक्सप्रेसवे प्रभावित क्षेत्रों में आने वाली भूमि की रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगाई जाए।
यह रोक इसलिए लगाई गई है ताकि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी भूमि का हस्तांतरण या बिक्री न हो सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने पर प्रभावित किसानों और भूमिधारकों को नियमों के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा।
इस आदेश के तहत तहसील सदर के 13 गांवों में कुल 69.57 हेक्टेयर भूमि रजिस्ट्री पर प्रतिबंधित कर दी गई है। यह भूमि गोरखपुर से आगे कुशीनगर जिले के हाटा, कसया और तमकुहीराज तहसीलों से होकर सिलीगुड़ी तक जाने वाले एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट का हिस्सा है।
नए एलाइनमेंट के अनुसार यह एक्सप्रेसवे 164 गांवों से गुजरेगा और इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार के 8 जिलों तथा पश्चिम बंगाल तक का मार्ग शामिल होगा। सीमा विवादों को समाप्त करने के लिए पैमाइश (मापन) कार्य भी शुरू कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के अनुरोध पर खजनी तहसील प्रशासन ने टीमों का गठन कर सर्विस रोड और फेंसिंग के काम की तैयारी शुरू कर दी है।
हालांकि, सरया तिवारी, डोहरिया, तेलियाभार, मलाव, हरदत्तपुर, बहादुरपुर खुर्द/बुजुर्ग और कटहा बाबू जैसे कुछ गांवों के निवासी सर्विस रोड और सीमा निर्धारण में देरी को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पूर्वोत्तर भारत और उत्तर भारत को सीधे जोड़ेगा। इसके बनने से यातायात समय में बचत, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी, साथ ही पूर्वांचल और बिहार–पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
NHAI द्वारा जारी अपडेट्स के अनुसार यह परियोजना 2028 तक पूरी होने की उम्मीद है। भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण के बाद निर्माण कार्यों में तेजी आएगी।