Thursday, January 29

पाकिस्तान में बाल विवाह कानून पर टकराव, मौलाना फजलुर रहमान ने दी खुली चुनौती

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में हाल ही में पारित पारिवारिक कानून सुधारों को लेकर सियासी और सामाजिक विवाद गहराता जा रहा है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) के प्रमुख और वरिष्ठ धार्मिक नेता मौलाना फजलुर रहमान ने बाल विवाह रोकथाम बिल और घरेलू हिंसा (रोकथाम एवं संरक्षण) अधिनियम का कड़ा विरोध करते हुए शहबाज शरीफ सरकार को खुली चुनौती दी है।

This slideshow requires JavaScript.

नेशनल असेंबली में संबोधन के दौरान मौलाना फजलुर रहमान ने इन कानूनों को “असंवैधानिक और इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ” बताते हुए कहा कि वह इन्हें स्वीकार नहीं करते। एक भड़काऊ बयान में उन्होंने दावा किया कि विरोध स्वरूप वह 10 वर्ष तक के नाबालिग बच्चों की शादियों में सहयोग करेंगे और स्वयं इसमें शामिल होकर कानून का उल्लंघन करेंगे।

सरकार द्वारा प्रस्तावित बाल विवाह रोकथाम बिल 2025 और घरेलू हिंसा अधिनियम 2026 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को बच्चा माना गया है तथा राजधानी क्षेत्र में विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु 18 वर्ष तय की गई है। इसके साथ ही पत्नी को तलाक या दूसरी शादी की धमकी देना, बिना सहमति के किसी के साथ रहने को मजबूर करना, अथवा परिवार के सदस्यों को मानसिक, भावनात्मक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना दंडनीय अपराध घोषित किया गया है।

मौलाना फजलुर रहमान ने संसद के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए मांग की कि इन विधेयकों को इस्लामिक विचारधारा परिषद के पास समीक्षा के लिए भेजा जाए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों को वह धार्मिक मानते हैं, उन पर कानून बनाने का अधिकार संसद को नहीं है।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक दलों, मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई संगठनों ने इसे बच्चों और महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि ये कानून अंतरराष्ट्रीय मानकों और मानवाधिकारों के अनुरूप हैं।

इस विवाद ने पाकिस्तान में एक बार फिर धार्मिक सत्ता, संवैधानिक शासन और मौलिक मानवाधिकारों के बीच संतुलन को लेकर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है।

 

Leave a Reply