Thursday, January 29

2032 में चंद्रमा से टकरा सकता है विशाल एस्टेरॉयड, पृथ्वी के सैटेलाइट नेटवर्क पर संकट की आशंका

बीजिंग। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने एक संभावित खगोलीय खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों के अनुसार, दिसंबर 2032 में एक विशाल एस्टेरॉयड चंद्रमा से टकरा सकता है, जिसका अप्रत्यक्ष असर पृथ्वी पर भी देखने को मिल सकता है। इस टक्कर से निकलने वाला मलबा पृथ्वी की ओर बढ़ सकता है, जिससे चारों ओर घूम रहे सैटेलाइटों को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

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वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस एस्टेरॉयड का नाम 2024 YR4 है, जिसकी चौड़ाई करीब 60 मीटर बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, 22 दिसंबर 2032 को इसके चंद्रमा से टकराने की संभावना लगभग 4 प्रतिशत है। भले ही यह संभावना कम हो, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह टक्कर होती है, तो इसका प्रभाव असाधारण रूप से शक्तिशाली होगा।

परमाणु धमाके जैसी ऊर्जा निकलने की आशंका

चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी के एक शोध पत्र में दावा किया गया है कि एस्टेरॉयड की यह टक्कर एक मध्यम आकार के थर्मोन्यूक्लियर (परमाणु) विस्फोट जितनी ऊर्जा उत्पन्न कर सकती है। यदि ऐसा हुआ, तो यह आधुनिक इतिहास में चंद्रमा पर दर्ज की गई सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक होगी। टक्कर से चंद्रमा की सतह पर लगभग एक किलोमीटर चौड़ा गड्ढा बन सकता है और करीब 5 मैग्नीट्यूड तीव्रता का भूकंप भी आ सकता है।

अंतरिक्ष में फैलेगा मलबा, पृथ्वी पर दिखेगा उल्कापिंडों का नजारा

इस टक्कर के बाद भारी मात्रा में चंद्रमा का मलबा अंतरिक्ष में फैल जाएगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका कुछ हिस्सा कुछ दिनों के भीतर पृथ्वी की ओर आ सकता है। इस दौरान पृथ्वी के वायुमंडल में बड़ी संख्या में उल्कापिंड प्रवेश कर सकते हैं, जिससे दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में नंगी आंखों से दिखने वाला अद्भुत खगोलीय नजारा देखने को मिल सकता है।

सैटेलाइटों पर मंडराया बड़ा खतरा

हालांकि, यह दृश्य जितना रोमांचक होगा, खतरा उतना ही गंभीर भी हो सकता है। सिमुलेशन से संकेत मिले हैं कि चरम स्थिति में हर घंटे लाखों उल्कापिंड पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकते हैं। इससे पृथ्वी की कक्षा में मौजूद संचार, मौसम और नेविगेशन से जुड़े सैटेलाइटों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि मलबे से सैटेलाइटों की श्रृंखलाबद्ध क्षति शुरू होती है, तो केसलर सिंड्रोम जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसी स्थिति में वैश्विक संचार, इंटरनेट सेवाएं और जीपीएस सिस्टम गंभीर रूप से बाधित हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों की नजर, एजेंसियां सतर्क

फिलहाल अंतरिक्ष एजेंसियां एस्टेरॉयड 2024 YR4 की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में इसके मार्ग और टक्कर की संभावना को लेकर और सटीक आकलन किया जाएगा, ताकि समय रहते आवश्यक सुरक्षा उपायों पर विचार किया जा सके।

इस संभावित घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अंतरिक्ष से आने वाले खतरों के प्रति मानव सभ्यता कितनी तैयार है।

 

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