
सियोल। दक्षिण कोरिया में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल की पत्नी और पूर्व फर्स्ट लेडी किम केओन ही को 20 महीने की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें राजनीतिक फायदे देने के बदले महंगे उपहार लेने का दोषी पाया। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देश पहले ही पूर्व राष्ट्रपति पर मार्शल लॉ लगाने जैसे गंभीर आरोपों को लेकर राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर चुका है।
सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किम केओन ही ने यूनिफिकेशन चर्च के अधिकारियों से चैनल ब्रांड का बैग और एक हीरे का पेंडेंट स्वीकार किया, जिसके बदले राजनीतिक लाभ दिए गए। अदालत ने इसे स्पष्ट रूप से रिश्वतखोरी करार दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर 12.8 मिलियन वॉन (करीब 9 हजार डॉलर) का जुर्माना लगाया और प्राप्त उपहारों को जब्त करने का आदेश दिया।
हालांकि, कोर्ट ने किम केओन ही को स्टॉक कीमतों में हेरफेर और राजनीतिक फंड कानून के उल्लंघन से जुड़े अन्य आरोपों में बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने का संकेत दिया है। इससे पहले अभियोजकों ने उनके लिए 15 साल की जेल और 2.9 बिलियन वॉन के भारी जुर्माने की मांग की थी।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए जस्टिस वू इन-सुंग ने कहा,
“जो व्यक्ति ऐसे पद से जुड़ा हो, वह भले ही हर समय आदर्श न बन सके, लेकिन उसे जनता के लिए गलत उदाहरण भी नहीं बनना चाहिए।”
अदालत ने स्पष्ट किया कि फर्स्ट लेडी का पद औपचारिक रूप से किसी सरकारी शक्ति से जुड़ा नहीं होता, लेकिन उससे जुड़ी नैतिक जिम्मेदारी कहीं अधिक होती है।
किम केओन का पक्ष
किम केओन ही ने सुनवाई के दौरान सभी आरोपों से इनकार किया था। फैसले के वक्त वह गहरे रंग का सूट और फेस मास्क पहने, सुरक्षा कर्मियों के साथ अदालत में मौजूद रहीं और पूरी कार्यवाही के दौरान शांत रहीं। उनके वकीलों ने कहा कि वे रिश्वतखोरी के मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ अपील करने पर विचार करेंगे।
एक आधिकारिक बयान में किम केओन ही ने कहा कि वह “अदालत की कड़ी आलोचना को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करती हैं” और “जनता की चिंता का कारण बनने के लिए क्षमा मांगती हैं।”
राजनीतिक पृष्ठभूमि में बढ़ा मामला
किम केओन ही, पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल की पत्नी हैं, जिन्हें पिछले वर्ष देश में मार्शल लॉ लागू करने के आरोपों के चलते पद से हटाया गया था। इस फैसले के बाद दक्षिण कोरिया में सत्ता, नैतिकता और कानून के शासन को लेकर बहस और तेज हो गई है।
इस सजा को दक्षिण कोरिया में यह संदेश माना जा रहा है कि चाहे पद कितना ही ऊंचा क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है।