
मुंबई। केंद्र सरकार का वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट रविवार, एक फरवरी को पेश किया जाना है। इससे पहले देश का दवा और स्वास्थ्य सेवा उद्योग आगामी बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठा है। फार्मा सेक्टर ने सरकार से रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए ठोस प्रोत्साहन, टैक्स में अधिक छूट और नवाचार को बढ़ावा देने की मांग की है।
ईटी-पीडब्ल्यूसी (ET-PwC) द्वारा किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि भारत दवा बाजार में मजबूत उपस्थिति रखने के बावजूद R&D पर अपेक्षाकृत बहुत कम खर्च कर रहा है। वर्तमान में भारत में फार्मा R&D पर लगभग 3 अरब डॉलर का निवेश होता है, जबकि चीन में यह आंकड़ा 15 से 20 अरब डॉलर और अमेरिका में 50 से 60 अरब डॉलर तक है।
R&D को बढ़ावा देना सबसे जरूरी
सर्वे में शामिल लगभग तीन-चौथाई मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CXOs) ने माना कि देश में ग्रोथ और नई खोजों को गति देने के लिए R&D को बढ़ावा देना सबसे अहम है। इसके लिए टैक्स इंसेंटिव्स बढ़ाने और ड्रग डिस्कवरी को विशेष सहायता देने की जरूरत बताई गई है।
यह सर्वे 40 CXOs पर आधारित है, जिनकी कंपनियों का सालाना कारोबार 500 करोड़ रुपये से लेकर 10,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
बायोटेक स्टार्टअप्स के लिए रिस्क फाइनेंसिंग की मांग
फार्मा इंडस्ट्री से जुड़े शीर्ष उद्योगपतियों का कहना है कि नई रिसर्च करने वाली बायोटेक स्टार्टअप्स के लिए तेज़ और प्रभावी रिस्क फाइनेंसिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल और तेज़ बनाने तथा डिजिटल तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि मंजूरी की प्रक्रिया आसान हो और भारतीय कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से उतर सकें।
GST की इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर पर चिंता
उद्योग जगत ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या की ओर भी सरकार का ध्यान खींचा है। कंपनियों का कहना है कि रेट रैशनलाइजेशन के जरिए इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए, जिससे फार्मा सेक्टर को ग्रोथ और इनोवेशन में मदद मिले। सर्वे में शामिल लगभग 67 प्रतिशत कंपनियों ने R&D इंसेंटिव्स को भविष्य की वृद्धि का सबसे बड़ा आधार बताया है।
2047 तक 450 अरब डॉलर की इंडस्ट्री का लक्ष्य
इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस के सचिव जनरल सुदर्शन जैन ने कहा कि भारतीय फार्मा उद्योग वर्ष 2030 तक 120-130 अरब डॉलर और 2047 तक 450 अरब डॉलर के आकार तक पहुंचने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बजट 2026 में R&D और इनोवेशन को बढ़ावा देने वाले इंसेंटिव्स को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वेटेड R&D डिडक्शन फिर शुरू करने की मांग
मैनकाइंड फार्मा के प्रमोटर और सीईओ शीतल अरोड़ा ने कहा कि यह बजट R&D टैक्स इंसेंटिव्स को बढ़ाने का एक अहम अवसर है। उन्होंने वैश्विक स्तर के अनुरूप वेटेड R&D डिडक्शन को दोबारा शुरू करने, प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं के विस्तार और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ड्यूटी रैशनलाइजेशन की मांग की।
सरकार से ठोस प्रावधानों की अपेक्षा
एकम्स ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की निदेशक आरुशी जैन ने कहा कि भारत आज दुनिया में जेनेरिक और किफायती दवाओं का एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बन चुका है। बड़े पैमाने पर उत्पादन और निर्यात से देश को विदेशी मुद्रा भी मिल रही है।
हालांकि उन्होंने चिंता जताई कि भारत में फार्मा R&D पर निवेश अभी भी बहुत कम है। ऐसे में आगामी बजट में सरकार को ऐसे ठोस प्रावधान करने चाहिए, जिससे देश में फार्मा रिसर्च को व्यापक बढ़ावा मिल सके।