
नई दिल्ली: हाल के दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में रेकॉर्ड तोड़ तेजी देखने को मिली है। दिल्ली में 99.9% शुद्ध सोने का भाव मंगलवार को ₹1,66,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो 4.6% की वृद्धि है। वहीं, चांदी की कीमत एक ही दिन में 12.3% बढ़कर ₹3,70,000 प्रति किलो पर पहुंची।
इस तेजी को देखकर कई निवेशक शेयर बेचकर कीमती धातुओं में पैसा लगाने की सोच रहे हैं। विशेषकर ऐसे रिटेल निवेशक जो पिछले डेढ़ साल में स्मॉल-कैप शेयरों में नुकसान उठा चुके हैं।
एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
Lighthouse Canton के इन्वेस्टमेंट हेड प्रदीप गुप्ता का कहना है कि सोना और चांदी पोर्टफोलियो के लिए ‘हेज’ हैं, मुनाफा कमाने का मुख्य जरिया नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि सिर्फ हालिया तेजी देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
आनंद राठी वेल्थ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुभेंदु हरिचंदन बताते हैं कि सोना-चांदी अक्सर शेयर बाजार की सुस्ती के समय चमकते हैं। लेकिन पिछले 16 वर्षों में चांदी ने 50% बार नेगेटिव रिटर्न दिया है। भारी तेजी के बाद निवेश करना गलत टाइमिंग बन सकता है।
क्या करें निवेशक?
निवेशक अपने रिस्क प्रोफाइल और पोर्टफोलियो की विविधता को ध्यान में रखें।
सोना-चांदी में अधिक निवेश करने से पोर्टफोलियो एक ही जगह सिमट सकता है।
शेयरों से पलायन अस्थायी हो सकता है; जैसे ही बाजार में ग्रोथ आएगी, निवेशक फिर शेयरों की ओर लौटेंगे।
निवेशकों के लिए संदेश:
सोना और चांदी सुरक्षा कवच हैं, न कि मुनाफा कमाने का मुख्य जरिया। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बिना बुनियादी विश्लेषण और जोखिम समझे शेयर बेचकर केवल सोना-चांदी में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।