Wednesday, January 28

भारत–ईयू एफटीए से खुला यूरोप का बाजार, यूपी के उद्योगों और किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

लखनऊ।
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए नए द्वार खोल दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संपन्न इस ऐतिहासिक समझौते के तहत अब उत्तर प्रदेश को यूरोप के 27 देशों और लगभग 45 करोड़ उपभोक्ताओं वाले विशाल बाजार तक आसान और प्रतिस्पर्धी पहुंच मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे प्रदेश में निर्यात, निवेश और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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यह एफटीए विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे श्रम-प्रधान राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां कारीगरों, किसानों और छोटे उद्योगों की बड़ी आबादी आजीविका पर निर्भर है। समझौते के तहत कई उत्पादों पर लगने वाला आयात शुल्क कम या पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, जिससे यूपी में बने उत्पाद यूरोपीय बाजार में सस्ते और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

श्रम-गहन उद्योगों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

इंडिया–ईयू एफटीए का सीधा फायदा उत्तर प्रदेश के श्रम-गहन उद्योगों को होगा। इनमें चमड़ा, फुटवियर, वस्त्र, हस्तशिल्प, कालीन, पीतल उद्योग, फूड प्रोसेसिंग और एमएसएमई आधारित उत्पादन इकाइयां प्रमुख हैं। शून्य या कम टैरिफ के कारण इन क्षेत्रों का निर्यात बढ़ेगा और उत्पादन क्षमता में विस्तार होगा।

कानपुर–आगरा के चमड़ा उद्योग को नई रफ्तार

कानपुर और आगरा दशकों से देश के प्रमुख चमड़ा और फुटवियर केंद्र रहे हैं। एफटीए के तहत 17 प्रतिशत तक के टैरिफ के समाप्त होने से यहां के जूते, लेदर गुड्स और एक्सेसरीज़ यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इससे हजारों टैनरियों, एमएसएमई इकाइयों और उनसे जुड़े कारीगरों को सीधा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

पारंपरिक कारीगरी को मिलेगी वैश्विक पहचान

सहारनपुर का लकड़ी आधारित हस्तशिल्प और फर्नीचर, मुरादाबाद का पीतल उद्योग तथा भदोही का कालीन उद्योग पहले से ही निर्यात उन्मुख हैं। एफटीए के बाद इन उत्पादों को यूरोप में बेहतर बाजार पहुंच और प्रतिस्पर्धी कीमत मिलेगी। इससे कारीगरों को स्थिर ऑर्डर, बेहतर आमदनी और वैश्विक ब्रांड पहचान मिलने की संभावना है। ओडीओपी योजना के तहत चिन्हित जिलों को इससे विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

नोएडा और ग्रेटर नोएडा का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम पहले ही वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। ईयू के 744 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने से इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी। इससे निवेश, तकनीकी सहयोग और कुशल मानव संसाधन की मांग बढ़ेगी।

किसानों को भी मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार

एफटीए का प्रभाव केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को भी इससे बड़ा लाभ होगा। चाय, कॉफी, मसाले, फल-सब्जियां, डेयरी उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड को यूरोपीय बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे। इससे एफपीओ, कोल्ड चेन, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और ग्रामीण रोजगार को मजबूती मिलेगी।

एमएसएमई, महिलाओं और युवाओं के लिए नए अवसर

उत्तर प्रदेश का एमएसएमई सेक्टर इस समझौते का प्रमुख लाभार्थी बनेगा। निर्यात आधारित उत्पादन बढ़ने से महिलाओं की भागीदारी, घरेलू कारीगरों की आय और युवाओं के लिए स्किल्ड व सेमी-स्किल्ड नौकरियों में तेजी आने की संभावना है। साथ ही लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, डिजाइन, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और ई-कॉमर्स जैसे सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

कुल मिलाकर, इंडिया–ईयू एफटीए उत्तर प्रदेश को यूरोपीय कंपनियों के लिए एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करता है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरिडोर, औद्योगिक पार्क और मेडिकल डिवाइस जैसे क्षेत्रों में ईयू निवेश बढ़ने की प्रबल संभावनाएं बन रही हैं।

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