
बस्ती (उत्तर प्रदेश): आठ साल पहले ट्रेन की देरी के कारण नीट (NEET) परीक्षा से वंचित रही उत्तर प्रदेश की छात्रा समृद्धि को आखिरकार न्याय मिला है। रेलवे को उपभोक्ता आयोग के आदेश के तहत छात्रा को 9.10 लाख रुपये मुआवजा के रूप में देने होंगे, साथ ही देरी से भुगतान होने पर 12% ब्याज भी जोड़ा जाएगा।
मामला क्या था?
2018 में समृद्धि बस्ती से लखनऊ के जय नारायण पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र के लिए इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन से निकली थी। ट्रेन नियत समय से ढाई घंटे लेट पहुंची, जिससे छात्रा समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच पाई और उसका नीट एग्ज़ाम छूट गया। उसका पूरा साल बर्बाद हो गया।
रेलवे ने माना दोष
समृद्धि ने वकील प्रभाकर मिश्रा की मदद से 20 लाख रुपये मुआवजे का दावा उपभोक्ता आयोग में दायर किया। रेल मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया। रेलवे ने अपनी गलती स्वीकार की, लेकिन देरी की वजह स्पष्ट नहीं कर पाया।
उपभोक्ता आयोग का निर्णय
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जज अरमजीत वर्मा और मेंबर अजय प्रकाश सिंह ने रेलवे को दोषी ठहराते हुए 9,10,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि भुगतान में देरी पर रेलवे 12% ब्याज भी दे।
स्टूडेंट्स के लिए सीख
समृद्धि का यह मामला सभी छात्रों के लिए संदेश है कि अपने हक के लिए लड़ाई कानूनी तरीके से लड़नी चाहिए।
सवाल पूछने का हक: सरकारी विभाग या संस्थान की गलती पर स्टूडेंट्स सवाल पूछ सकते हैं।
अधिकार जानें: अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी जरूरी है।
सही तरीका अपनाएं: गुस्से में सोशल मीडिया या हिंसात्मक कदम उठाना नुकसानदेह हो सकता है।
कानूनी रास्ते
रेल या बस में देरी, परीक्षा से वंचित होना, या सेवा में कमी होने पर छात्र कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए टिकट, डिले सर्टिफिकेट, एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्र के नोटिस/ईमेल, CCTV फुटेज आदि सबूत के तौर पर जरूरी हैं। RTI के जरिए देरी की वजह पूछना भी मददगार साबित हो सकता है।
समृद्धि की जीत यह साबित करती है कि धैर्य, सही कानूनी रास्ता और हक की लड़ाई से कोई भी इंसाफ पा सकता है।