
नई दिल्ली: भारत में शिक्षा क्षेत्र की दिशा 2026 में आम बजट से तय होने वाली है। 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले बजट में शिक्षा पर किए जाने वाले खर्च और नई नीतियों पर सभी की निगाहें हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार शिक्षा बजट न केवल बढ़ सकता है बल्कि स्किल डेवलपमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक पाठ्यक्रमों पर जोर दिया जा सकता है।
शिक्षा पर वर्तमान खर्च
विशेषज्ञों के अनुसार, विकसित देशों में शिक्षा पर जीडीपी का 6-10 प्रतिशत खर्च होता है, जबकि भारत में यह केवल 4-5 प्रतिशत के बीच है। ग्लोबल हब बनने के लिए खर्च बढ़ाने की जरूरत है।
पिछले वर्षों में शिक्षा का बजट:
| वर्ष | स्कूली शिक्षा (करोड़) | उच्च शिक्षा (करोड़) | कुल बजट (करोड़) |
| —- | ——————— | ——————- | ————— |
| 2025 | 78,572 | 50,077 | 1,28,649 |
| 2024 | 73,498 | 47,619.77 | 1,21,118 |
| 2023 | 68,804.85 | 44,094.62 | 1,12,899.47 |
Budget 2026 में संभावित बदलाव:
शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए स्किल डेवलपमेंट पर जोर।
IIT, IIM और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में सीटों की संख्या बढ़ाना।
आधुनिक लैब्स, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और AI-आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म के लिए फंड।
इंडस्ट्री 4.0 कोर्सेज (AI, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स, स्मार्ट एग्रीकल्चर, साइबर सुरक्षा आदि) और इंटर्नशिप व वोकेशनल ट्रेनिंग को बढ़ावा।
शिक्षा और रोजगार को जोड़ने के लिए कॉर्पोरेट और CSR फंड का सहयोग।
विशेषज्ञों की राय:
प्रो. केके अग्रवाल, प्रेजिडेंट, साउथ एशियन यूनिवर्सिटी: “भारत और विदेशी संस्थानों के बीच रिसर्च और अकादमिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में बजट अहम भूमिका निभाएगा।”
एसके गुप्ता, शिक्षाविद्: “शिक्षा को रोजगार से जोड़ना ही मौजूदा सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए खर्च बढ़ाना और इंडस्ट्री का सहयोग लेना जरूरी है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 का बजट शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों का संकेत देगा और भारत को शिक्षा के ग्लोबल हब बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।