
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत इस समय हरा बनाम भगवा की रंगत में रंगी हुई है। एआईएमआईएम के नेता इम्तियाज जलील और वारिस पठान द्वारा महाराष्ट्र और देश को हरे रंग में बदलने वाले विवादित बयानों के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने इस मुद्दे पर जमकर पलटवार किया।
जलील और पठान के बयान
एआईएमआईएम नेता इम्तियाज जलील ने राज्य में पार्टी के विस्तार और नव निर्वाचित पार्षद सहर शेख के ‘मुंब्रा को हरा कर देंगे’ वाले बयान का समर्थन किया। जलील ने कहा, “सिर्फ मुंब्रा ही नहीं, बल्कि हम पूरे महाराष्ट्र में हरा रंग फैलाएंगे।” इस बयान ने राज्य में हरा बनाम भगवा की बहस को फिर से उभार दिया।
बीजेपी और शिवसेना का विरोध
नेता शाइना एनसी ने कहा कि एआईएमआईएम केवल इस्लामीकरण की राजनीति करती है। उन्होंने वारिस पठान और जलील पर निशाना साधते हुए कहा, “आपके दादा-परदादा भी इस देश को हरा नहीं कर पाए। औरंगजेब हो, अकबर हो, बाबर हो, हुमायूं हो, वो भी सक्षम नहीं हुए। यह महाराष्ट्र है, छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि। भगवा हमारा अस्तित्व और अभिमान है। जनता आपको नकार देगी।”
बीजेपी नेता कृष्णा हेगड़े ने कहा कि वारिस पठान और जलील अपने चुनाव नहीं जीत पाए। उन्होंने चेतावनी दी कि ये नेता दो धर्मों में बंटवारा कर भाषण देंगे तो कानून को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह छत्रपति शिवाजी महाराज की धरती है। यहां पहले भी भगवा था, आज भी भगवा रहेगा।”
मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने पलटवार करते हुए कहा, “एआईएमआईएम नेता 100 बार जन्म लेने के बाद भी भगवा रंग को छू तक नहीं पाएंगे। जलील को महाराष्ट्र की संस्कृति और लोकाचार समझना चाहिए। यह छत्रपति संभाजी महाराज, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और बालासाहेब ठाकरे की भूमि है।”
बीजेपी नेता और मंत्री नितेश राणे ने इम्तियाज जलील और वारिस पठान को पाकिस्तान जाने की सलाह दी। वरिष्ठ नेता और मंत्री गणेश नाइक ने भी इस विवाद को लेकर सहयोगियों पर पलटवार किया।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि महाराष्ट्र में एआईएमआईएम और बीजेपी/शिवसेना के बीच यह बहस केवल प्रतीकात्मक रंगों की नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान की लड़ाई बन चुकी है।