
नागपुर: राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकलकर अरबों डॉलर का व्यवसायिक साम्राज्य खड़ा करने वाले सत्यनारायण नंदलाल नुवाल को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है। सोलार इंडस्ट्रीज के चेयरमैन नुवाल ने अपने करियर की शुरुआत इंक बनाने से की और धीरे-धीरे डिफेंस सेक्टर में हथियार निर्माण तक का लंबा सफर तय किया।
बचपन और शुरुआती संघर्ष
सत्यनारायण नुवाल का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ। आर्थिक तंगी के कारण उनकी पढ़ाई सिर्फ 10वीं तक ही हो पाई। 19 साल की उम्र में उन्होंने शादी कर परिवार की जिम्मेदारियाँ अपने कंधों पर संभाली। जीवन की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।
काम की तलाश और अवसर
बेहतरीन अवसर की तलाश में वे महाराष्ट्र के चंद्रपुर आए। वहां उन्हें रिश्तेदार के माध्यम से काम मिला। इसी दौरान उनकी मुलाकात अब्दुल सत्तार अल्लाहभाई से हुई, जिनके पास एक्सप्लोसिव का लाइसेंस और एम्युनिशन डिपो था। नुवाल ने डिपो को महज 1 हजार रुपये महीने के किराए पर लिया, और विश्वास को सफलता में बदल दिया। धीरे-धीरे कोयला खदानों से ऑर्डर मिलने लगे और छोटे लेन-देन बड़ी डील में बदल गए।
सोलार इंडस्ट्रीज का निर्माण
1980 तक नुवाल ने एक्सप्लोसिव इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना ली। 1995 में बैंक से लिए गए 60 लाख रुपये के लोन ने सोलार इंडस्ट्रीज की नींव रखी। लाइसेंस मिलने, प्रोडक्शन बढ़ने और प्रोजेक्ट्स चलने के बाद कंपनी ने मजबूती से कदम रखा। 2006 में कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्ट हुई और 2010 में यह भारत की पहली प्राइवेट कंपनी बनी जिसे इंडियन आर्मी के लिए एक्सप्लोसिव बनाने का लाइसेंस मिला।
अरबों डॉलर में दौलत और वैश्विक पहचान
आज सोलार इंडस्ट्रीज लगभग 100 देशों में सक्रिय है। डिफेंस से लेकर माइनिंग इंडस्ट्री, एक्सप्लोसिव से लेकर एम्युनिशन तक, नुवाल का साम्राज्य अरबों डॉलर में मापा जाता है। 2022 में उन्हें फोर्ब्स द्वारा घोषित अरबपतियों की लिस्ट में शामिल किया गया।
अनुभव से मिली सबसे बड़ी शिक्षा
सत्यनारायण नुवाल ने केवल 10वीं तक पढ़ाई की, लेकिन जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा उन्होंने अनुभव से हासिल की। धैर्य, संघर्ष, विश्वास और सही समय पर अवसर का महत्व उन्होंने बखूबी समझा। यही कारण है कि उनका नाम सिर्फ दौलत के लिए नहीं, बल्कि सम्मान और प्रेरणा के लिए भी लिया जाता है।
पद्म श्री ने दी नई प्रेरणा
नुवाल कहते हैं, “डिफेंस सेक्टर में काम करते हुए मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे पद्म श्री मिलेगा। यह सम्मान मेरे काम को मान्यता देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मेरी हिम्मत और बढ़ा रहा है।”
सत्यनारायण नुवाल की कहानी साबित करती है कि संकट और संघर्ष से ही सफलता का निर्माण होता है, और सही अवसर मिलने पर मेहनत और आत्मविश्वास हर मंजिल को संभव बना सकता है।