
नई दिल्ली।
संसद के बजट सत्र 2026 की शुरुआत से पहले कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने मंगलवार को कहा कि वह सत्र के दौरान सरकार की विदेश नीति, अमेरिकी शुल्क (टैरिफ), डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत, मनरेगा सहित जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाएगी।
सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस का हमला
सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार संविधान से मिले अधिकारों को कमजोर कर रही है और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर चोट पहुंचा रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस विदेश नीति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगेगी। उनके शब्दों में, “आज हमारी विदेश नीति की स्थिति यह है कि कोई हमारे साथ खड़ा नजर नहीं आता। यह भी स्पष्ट नहीं है कि भारत किसके साथ है और कौन हमारे साथ है।”
आर्थिक नीतियों पर सवाल
कांग्रेस ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी तीखा हमला बोला। प्रमोद तिवारी ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ और रूस से तेल खरीद के मुद्दे को भी संसद में उठाने की बात कही।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के मुद्दे
कांग्रेस ने दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति का मुद्दा उठाने का ऐलान किया है। इसके साथ ही इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को भी संसद के पटल पर रखने की बात कही गई है।
मनरेगा और रोजगार का मुद्दा
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को नाम बदलकर धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी खत्म हो रहे हैं।
अन्य प्रमुख मुद्दे
कांग्रेस ने बताया कि बजट सत्र के दौरान पार्टी जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली, कथित ‘वोट चोरी’, और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाएगी।
सरकार पर दबाव की रणनीति
कांग्रेस का कहना है कि बजट सत्र के दौरान वह सरकार को जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े सवालों पर घेरने की पूरी तैयारी के साथ सदन में उतरेगी।