Tuesday, January 27

शंकराचार्य विवाद उमा भारती ने अपनी ही सरकार पर साधा निशाना, योगी आदित्यनाथ को टैग कर पूछा कठिन सवाल

भोपाल/प्रयागराज: प्रयागराज में माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश प्रशासन के बीच शंकराचार्य उपाधि को लेकर चल रहे विवाद में अब बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने भी कदम रखा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का सबूत मांगना उनके अधिकारों और मर्यादाओं का उल्लंघन है।

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उमा भारती ने क्या कहा

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी टैग किया। उन्होंने लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी सरकार के बीच इस मामले का सकारात्मक समाधान निकल आएगा। उन्होंने साफ किया कि शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना गलत है, क्योंकि यह अधिकार केवल शंकराचार्यों और विद्वत परिषद का है।

विवाद की शुरुआत

यह विवाद मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले के दौरान शुरू हुआ। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर लापरवाही और अनुचित हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए अनशन शुरू कर दिया। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उच्चतम न्यायालय के नोटिस का हवाला देते हुए उन्हें नोटिस जारी किया और जवाब मांगा।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि शंकराचार्य वह व्यक्ति होता है जिसे अन्य तीन पीठों के शंकराचार्य मान्यता देते हैं। उन्होंने दावा किया कि द्वारका पीठ और श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य उन्हें शंकराचार्य मानते हैं और पिछले माघ मेले में दोनों शंकराचार्य उनके साथ स्नान कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अन्य शंकराचार्य उन्हें मान्यता दे रहे हैं, तो प्रशासन को किस प्रमाण की आवश्यकता है।

उमा भारती का निष्कर्ष

उमा भारती ने अपने पोस्ट में लिखा:
“मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा। किंतु प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है। यह अधिकार तो केवल शंकराचार्यों और विद्वत परिषद का है।”

इस पोस्ट में उमा भारती ने BJP एमपी, BJP यूपी, यूपी सीएम ऑफिस और ज्योतिर्मठ को भी टैग किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि विवाद केवल प्रशासन और संत समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि बीजेपी के भीतर भी इसे लेकर बहस शुरू हो गई है।

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