
पटना:
बिहार पुलिस भर्ती के नाम पर भोले-भाले युवाओं से ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पटना पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस सनसनीखेज खुलासे की अगुवाई नगर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) पटना आईपीएस भानु प्रताप सिंह ने की। उनकी सख्त रणनीति और तेज कार्रवाई के चलते दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और एक बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुल गईं। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर आईपीएस भानु प्रताप सिंह चर्चा के केंद्र में हैं। आइए जानते हैं, कौन हैं यह जांबाज़ अफसर।
उत्तर प्रदेश से बिहार तक का प्रेरक सफर
आईपीएस भानु प्रताप सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी के रहने वाले हैं। अपने कर्तव्यनिष्ठ और न्यायप्रिय स्वभाव के कारण उनकी तुलना अक्सर फिल्म ‘सूर्यवंशम’ के भानु प्रताप से की जाती है। बिहार कैडर के सबसे तेज-तर्रार और कर्मठ अधिकारियों में उनकी गिनती होती है।
शैक्षणिक उपलब्धियों में भी अव्वल
भानु प्रताप सिंह की पहचान सिर्फ एक सख्त अफसर के रूप में ही नहीं, बल्कि एक मेधावी छात्र के रूप में भी है। उन्होंने हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (एमए) की पढ़ाई की है। खास बात यह है कि 2018 से 2020 के बीच उन्होंने लगातार तीन बार UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास की, जो उनकी असाधारण प्रतिभा और अटूट मेहनत को दर्शाता है। हिंदी साहित्य को वैकल्पिक विषय बनाकर उन्होंने यूपी पीसीएस और सिविल सेवा—दोनों में सफलता हासिल की।
‘लाठीचार्ज एक्सपर्ट’ के नाम से मशहूर
प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली अहम पोस्टिंग मुजफ्फरपुर में टाउन एएसपी के तौर पर हुई। यहां उन्होंने सड़कों पर दबंगई, नेतागिरी और गुंडागर्दी करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। अपराधियों को खुली चेतावनी देना और जरूरत पड़ने पर खुद लाठी लेकर कार्रवाई करना उनकी पहचान बन गया। इसी कारण लोग उन्हें मजाक-मजाक में ‘लाठीचार्ज एक्सपर्ट’ कहने लगे।
दबंग कार्रवाई से बनाई अलग पहचान
दानापुर में एएसपी के पद पर रहते हुए भानु प्रताप सिंह ने कई बड़े और चर्चित ऑपरेशन किए। दिसंबर 2024 में बाहुबली विधायक रीतलाल यादव के भाई पिंकू यादव के खिलाफ की गई कार्रवाई ने उन्हें खासा सुर्खियों में ला दिया। राजनीतिक दबाव और रसूख की परवाह किए बिना कानून का शिकंजा ऐसा कसा गया कि आरोपी को आत्मसमर्पण करना पड़ा। इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे में उनकी ‘निडर’ और ‘दबंग’ छवि को और मजबूत किया।
फर्जीवाड़े पर करारा प्रहार
अब बिहार पुलिस भर्ती के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर आईपीएस भानु प्रताप सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ उनकी यह सख्त कार्रवाई न सिर्फ अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि आम जनता के लिए भरोसे की मिसाल भी।
निष्कर्ष:
आईपीएस भानु प्रताप सिंह आज के उन चुनिंदा अफसरों में हैं, जिनके लिए वर्दी सिर्फ पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और साहस का प्रतीक है। ईमानदारी, निडरता और कर्तव्यपरायणता ही उनकी असली पहचान है।