Tuesday, January 27

दिल दुखाना भी हिंसा है, किसी का हक छीनना अधर्म: वसुंधरा राजे

जयपुर/छोटी खाटू: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने डीडवाना में आयोजित आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव के अवसर पर कहा कि जैन धर्म का मूल आधार अहिंसा है। किसी भी जीव या प्राणी के जीवन को नुकसान पहुँचाना हिंसा की श्रेणी में आता है, लेकिन हिंसा केवल शारीरिक नहीं होती। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी का दिल दुखाना या किसी का हक छीनना भी अधर्म और हिंसा के रूप में माना जाता है।

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राजनीति में भी संवेदनशीलता जरूरी
वसुंधरा राजे ने कहा कि राजनीति में अक्सर ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं, जहां लोगों के दिल तोड़े और भावनाओं को ठेस पहुंचाई जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवन में मानवीय संवेदनाओं का सम्मान बनाए रखना अनिवार्य है।

राजमाता से मिले संस्कारों का पालन
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें राजमाता विजयाराजे सिंधिया से यह संस्कार प्राप्त हुए हैं कि कभी किसी का मन आहत नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं उन्हीं की राह पर चलने का प्रयास कर रही हूं और यही मेरी जीवनशैली का आधार है।”

आध्यात्मिकता और आत्मचिंतन का महत्व
वसुंधरा राजे ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग आत्मचिंतन और ईश्वर स्मरण के लिए समय नहीं निकाल पाते। थोड़ा समय निकालकर भगवान का स्मरण और आत्मचिंतन जीवन में संतुलन लाने में मदद करता है।

नैतिकता और नशामुक्ति पर जोर
इस अवसर पर युगप्रधान आचार्य महाश्रमण ने कहा कि जीवन में नैतिकता, सद्भावना और नशामुक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वसुंधरा राजे को संस्कारवान जननेता बताया और यह भी उल्लेख किया कि वह संतों के समक्ष आसन या कुर्सी का उपयोग नहीं करतीं, जो उनके उच्च संस्कारों को दर्शाता है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समाज के लोग उपस्थित रहे। महाश्रमण मर्यादा महोत्सव समिति ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का सम्मान भी किया।

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