
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली की चमक-दमक के पीछे एक स्याह सच्चाई छिपी है। पिछले 11 साल में राजधानी से कुल 2,55,432 लोग लापता हुए हैं, यानी औसतन हर दिन 63 लोग अपने घरों से अचानक गायब हो जाते हैं। इनमें बालिगों और नाबालिगों दोनों की बड़ी संख्या शामिल है।
टूटे सपने और अधूरी कहानियां
आंकड़ों के मुताबिक, हर साल औसतन 23,221 लोग लापता हो रहे हैं। इनमें से लगभग 18,314 लोग या तो घर लौट आते हैं या पुलिस द्वारा खोजे जाते हैं। लेकिन करीब 4,907 लोगों का आज भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की अधूरी कहानियां, टूटे सपने और अपनों से मिलने की लगातार उम्मीद की कहानी हैं।
बालिगों की संख्या ज्यादा, महिलाएं प्रमुख रूप से लापता
बीते 11 साल में 18 साल से अधिक उम्र के 1,87,191 लोग लापता हुए। इनमें 87,551 पुरुष और 99,668 महिलाएं थीं। कुल 1,40,251 लोगों को ढूंढ लिया गया, लेकिन अभी भी 46,948 लोग लापता हैं, जिनमें 25,093 महिलाएं शामिल हैं। सबसे अधिक लोग 2024 में गायब हुए – कुल 19,047, जिनमें 10,555 महिलाएं थीं।
नाबालिग लड़कियां ज्यादा गुम
18 साल से कम उम्र के बच्चों में 68,233 लापता हुए, जिनमें 44,638 लड़कियां और 23,595 लड़के शामिल हैं। सबसे अधिक 4,367 लड़कियां 2023 में लापता हुईं। कुल मिलाकर 61,198 बच्चों को ढूंढ लिया गया, जबकि 7,035 अब भी लापता हैं।
कोरोना के दौरान गिरावट, फिर बढ़त
कोविड-19 महामारी के समय यानी 2020 में लापता लोगों की संख्या सबसे कम 17,944 दर्ज हुई, जिनमें 14,655 लोग मिल गए, लेकिन 3,289 लोग अब भी लापता हैं। इसके बाद हर साल लापता लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी।
पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल महिलाओं और बच्चों के गायब होने की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले तीन साल में ट्रेस होने के आंकड़ों में गिरावट आई है, जो कानून व्यवस्था और पुलिस के लिए गंभीर चुनौती है।
दिल्ली में यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि यह हर परिवार की सुरक्षा और मानसिक शांति के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।