
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने कहा है कि शीर्ष अदालत का उद्देश्य नागरिकों की स्वतंत्रता छीनना नहीं बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा करना है। न्यायमूर्ति भुइयां ने अदालतों से अपील की कि वे एक स्वर में कानून का पालन सुनिश्चित करें और सभी न्यायालयों में कानून का समान रूप से क्रियान्वयन हो।
गोवा में ‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन’ द्वारा आयोजित परिचर्चा में न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन कानून के मूलभूत सिद्धांतों पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों को निष्पक्ष और विश्वसनीय रहना चाहिए और अपराधियों के राजनीतिक प्रभाव से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
न्यायमूर्ति भुइयां ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को ‘‘अपरिवर्तनीय’’ बताया और जोर दिया कि न्यायाधीशों के तबादलों और नियुक्तियों में केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के लिए सबसे बड़ा खतरा अंदर से ही उत्पन्न होता है और स्वतंत्रता की रक्षा सर्वोपरि है।