
गणतंत्र दिवस परेड में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को पीछे बैठने को लेकर विवाद गरमाया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि इस बार की बैठने की व्यवस्था संवैधानिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन करती है और लोकतांत्रिक मर्यादा को कमजोर करती है।
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस फैसले को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं के साथ ऐसा व्यवहार सिर्फ हीन भावना और राजनीतिक निराशा को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह देश में शिष्टाचार, परंपरा और प्रोटोकॉल के मानकों के अनुरूप है।
सीनियर कांग्रेस नेताओं ने भी अपनी नाराजगी जताई। सांसद मणिक्कम टैगोर ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ बैठने की जगह तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार के राजनीतिक रवैये को उजागर करता है। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 तक सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और एल.के. आडवाणी जैसे विपक्षी नेता हमेशा समान पंक्ति में बैठते थे। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि राहुल गांधी और खरगे दोनों अहम संवैधानिक पदों पर हैं और उन्हें पहली पंक्ति में बैठने का अधिकार है।
प्रोटोकॉल और नियम क्या कहते हैं?
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में बैठने की व्यवस्था वरीयता तालिका (Table of Precedence) के अनुसार तय होती है। राष्ट्रपति सचिवालय के अनुसार, इस तालिका में संवैधानिक पद, पूर्व प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, भारत के चीफ जस्टिस और केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों को प्राथमिकता दी जाती है। यह व्यवस्था राजनीतिक संबद्धता पर आधारित नहीं होती।
बीजेपी का पलटवार
कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए बीजेपी ने कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह में बैठने की व्यवस्था पूरी तरह से तय प्रोटोकॉल के अनुसार की गई थी। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस अपने परिवार-केंद्रित दृष्टिकोण और अहंकार को संविधान से ऊपर रखती है। उन्होंने बताया कि तालिका या वारंट के अनुसार सीटें तय की जाती हैं, और इस व्यवस्था में राहुल गांधी के आसपास वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री भी मौजूद थे।
बीजेपी का कहना है कि यह विवाद केवल राजनीतिक लाभ के लिए बनाया गया और वास्तविकता में बैठने की व्यवस्था पूरी तरह संवैधानिक और पारंपरिक मानकों के अनुरूप थी।