Tuesday, January 27

यूजीसी कानून 2026 के विरोध में इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री निलंबित, जांच के आदेश

बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा यूजीसी कानून 2026 के विरोध में दिए गए इस्तीफे के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार न करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश के साथ ही उन्हें शामली के जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं, जिसकी जिम्मेदारी बरेली के मंडलायुक्त को सौंपी गई है।

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सोमवार देर रात इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें बरेली के जिलाधिकारी ने बातचीत के लिए अपने आवास पर बुलाया, जहां उन्हें लगभग 45 मिनट तक रोके रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान सुरक्षा को लेकर उन्हें आशंका हुई और इसी कारण उन्होंने सरकारी आवास खाली करने का निर्णय लिया।

डीएम आवास पर बुलाने और दबाव के आरोप

सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि जब वह डीएम आवास पहुंचे, उस समय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मौजूद नहीं थे। बाद में डीएम द्वारा फोन कर एसएसपी को भी बुला लिया गया। इस दौरान उनके साथ आए सचिव और अन्य कर्मचारियों को बाहर बैठा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान मुद्दे को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश की गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें तीन-चार दिन की छुट्टी लेने और जल्दबाजी न करने का सुझाव दिया गया, ताकि यह संदेश जाए कि इस्तीफा कार्यभार के दबाव में दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर से संबंधित अधिकांश कार्य पहले ही पूरा हो चुका है और इस्तीफे को गलत संदर्भ में पेश करने का प्रयास किया जा रहा था।

बंधक बनाए जाने का दावा

अलंकार अग्निहोत्री ने दावा किया कि उन्हें रातभर रोके रखने की कोशिश की गई। इसी दौरान उन्होंने अपने सचिव दीपक पांडेय को फोन कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उनका कहना है कि जब यह बात मीडिया तक पहुंची कि उन्हें बंधक बनाया गया है, तब आनन-फानन में उन्हें छोड़ा गया।

भावुक होते हुए सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि वह बड़ी मुश्किल से वहां से बाहर निकल पाए। उन्होंने आशंका जताई कि यदि उनके सचिव साथ न होते तो कोई अप्रिय घटना भी हो सकती थी। उन्होंने सरकारी आवास को असुरक्षित बताते हुए उसे खाली करने का फैसला लिया।

यूजीसी कानून 2026 का विरोध क्यों

दरअसल, यूजीसी द्वारा ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू किए गए हैं। इसके तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समानता प्रकोष्ठ का गठन किया जाना है, जहां एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भेदभाव से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।

सवर्ण वर्ग के कुछ संगठनों ने इस कानून को असमानता बढ़ाने वाला बताते हुए इसके दुरुपयोग की आशंका जताई है। प्रदेश के कई हिस्सों में इसका विरोध जारी है। इसी क्रम में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा इस्तीफा दिए जाने से मामला और तूल पकड़ गया।

राज्यपाल और राष्ट्रपति से की अपील

अलंकार अग्निहोत्री ने राज्यपाल और राष्ट्रपति से अपील करते हुए कहा कि मौजूदा हालात चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विवेक के आधार पर इस्तीफा देने और समाज की आवाज उठाने पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और अलग स्तर की सुरक्षा की मांग की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देर रात सिटी मजिस्ट्रेट ने अपना सरकारी आवास खाली कर दिया। इस दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

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