Tuesday, January 27

नोएडा में इंजीनियर की मौत का मामला: अथॉरिटी की रिपोर्ट में बिल्डर जिम्मेदार, एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

नोएडा। सेक्टर-150 में गड्ढे में कार के साथ डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। नोएडा अथॉरिटी ने इस संबंध में विशेष जांच टीम (एसआईटी) को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि जिस प्लॉट पर हादसा हुआ, उसके गड्ढे में तब्दील होने के लिए संबंधित बिल्डर जिम्मेदार है। रिपोर्ट मंगलवार को शासन को सौंपी जा सकती है, जिसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

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नोएडा अथॉरिटी के अनुसार, स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के तहत 300 एकड़ भूमि का आवंटन अथॉरिटी द्वारा किया गया था। इसके बाद संबंधित बिल्डर ने इस भूमि को 24 सब-लीजधारकों को बेच दिया। जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वह एक सब-लीजधारक का प्लॉट था और वहां बेसमेंट की खुदाई भी उसी बिल्डर द्वारा कराई गई थी। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यह प्लॉट खतरनाक गड्ढे में तब्दील हो गया।

पुलिस और अथॉरिटी की भूमिका भी जांच के दायरे में

सूत्रों के अनुसार, अथॉरिटी की रिपोर्ट में नोएडा अथॉरिटी के ट्रैफिक सेल और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हादसे से पहले मौके पर सुरक्षा इंतजाम और चेतावनी संकेतों की कमी को गंभीर चूक माना गया है।

एसआईटी सौंपेगी अंतिम रिपोर्ट

इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच पूरी कर ली है। सूत्रों का कहना है कि टीम मंगलवार या बुधवार तक अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। एसआईटी ने मुख्यमंत्री कार्यालय से मुलाकात का समय भी मांगा है, हालांकि देर शाम तक अपॉइंटमेंट की पुष्टि नहीं हो पाई थी।

कार्रवाई को लेकर तीन स्तर की सिफारिश

एसआईटी की रिपोर्ट में कार्रवाई को लेकर तीन स्तर की सिफारिशें होने के संकेत मिल रहे हैं। इनमें तत्काल विभागीय कार्रवाई, अनुशासनात्मक जांच व चार्जशीट तथा सीधे कानूनी कार्रवाई शामिल है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर कुछ अधिकारियों पर तुरंत गाज गिर सकती है।

तबादलों और कार्रवाई की तैयारी

जांच पूरी होने की खबर के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट सामने आने के बाद नोएडा अथॉरिटी में बड़े स्तर पर तबादले किए जा सकते हैं। 10 से 15 अधिकारियों के तबादले की संभावना जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में पहले ही नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटाया जा चुका है।

पहले से सीबीआई जांच के घेरे में बिल्डर

अथॉरिटी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2022 में स्पोर्ट्स सिटी का मास्टर प्लान निरस्त किया जा चुका है। इस परियोजना के मुख्य बिल्डर और अन्य के खिलाफ पहले से ही सीबीआई में मुकदमा दर्ज है और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अथॉरिटी ने बिल्डर को जारी किए गए नोटिस और की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा एसआईटी को सौंप दिया है।

हालांकि, अथॉरिटी अपने ट्रैफिक सेल की खामियों से पूरी तरह पल्ला नहीं झाड़ सकी है। इस मामले में ट्रैफिक सेल के एक जूनियर इंजीनियर को पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है।

जनाक्रोश की चेतावनी

इस हादसे को लेकर जनता में पहले से ही भारी आक्रोश है। जानकारों का मानना है कि यदि एसआईटी की रिपोर्ट के अनुरूप सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो जनाक्रोश और भड़क सकता है। यह मामला अब एक दुर्घटना से आगे बढ़कर प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन चुका है।

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