Tuesday, January 27

राहुल गांधी से मिलना कठिन या भीतर की बेचैनी? कांग्रेस में मुस्लिम नेतृत्व की अनदेखी पर उठे सवाल

पटना।
कांग्रेस पार्टी के भीतर मुस्लिम नेताओं की कथित अनदेखी और शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच को लेकर उठे सवालों ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां कुछ वरिष्ठ मुस्लिम नेता राहुल गांधी की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर से ही इन आरोपों को व्यक्तिगत असंतोष बताकर खारिज किया जा रहा है।

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बिहार के कटिहार से कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मुस्लिम नेताओं से अपील की है कि यदि उन्हें किसी तरह की उपेक्षा महसूस होती है, तो वे सीधे पार्टी के आलाकमान से संवाद करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है और संवाद के रास्ते हमेशा खुले होने चाहिए।

तारिक अनवर का राहुल गांधी के समर्थन में बयान

नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान तारिक अनवर ने कहा,
“अगर किसी नेता को लगता है कि उसकी बात नहीं सुनी जा रही या सामूहिक नेतृत्व को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा, तो इस पर पार्टी नेतृत्व से बातचीत होनी चाहिए। सार्वजनिक बयानबाजी से बेहतर है कि अंदरूनी मंचों पर इन मुद्दों को सुलझाया जाए।”

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी का मजबूत रहना लोकतंत्र के लिए जरूरी है और पार्टी को आत्ममंथन करते हुए खुद को और बेहतर बनाना चाहिए।

शकील अहमद के तीखे आरोप से शुरू हुआ विवाद

इस बहस की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “डरपोक और असुरक्षित नेता” करार दिया। अहमद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी वरिष्ठ और जनाधार वाले नेताओं के साथ असहज महसूस करते हैं और केवल चापलूसी करने वाले नेताओं को तरजीह देते हैं।

उन्होंने राहुल गांधी की कार्यशैली को अलोकतांत्रिक बताते हुए यहां तक कहा कि इसी रवैये के चलते कांग्रेस को अमेठी जैसी पारंपरिक सीट गंवानी पड़ी। 2025 के चुनाव के बाद कांग्रेस छोड़ चुके शकील अहमद का कहना है कि पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र कमजोर हुआ है।

राशिद अल्वी के आरोप और बाद की पलटी

इसी कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने भी कहा कि राहुल गांधी तक पहुंच आसान नहीं रह गई है और इससे पार्टी में “कम्युनिकेशन गैप” पैदा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम नेता सत्ता की लालसा में नहीं, बल्कि नेतृत्व की अनदेखी के कारण पार्टी छोड़ रहे हैं।

हालांकि, बाद में राशिद अल्वी अपने रुख से कुछ पीछे हटते नजर आए और उन्होंने यह भी कहा कि देश को राहुल गांधी जैसे नेता की जरूरत है। उनके इस बयान को सियासी गलियारों में “यू-टर्न” के रूप में देखा जा रहा है।

पार्टी के भीतर मंथन की जरूरत

इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संवाद और प्रतिनिधित्व जैसे अहम सवालों को फिर से केंद्र में ला दिया है। जहां एक ओर कुछ नेता इसे व्यक्तिगत असंतोष बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पार्टी में सभी वर्गों और समुदायों की आवाज समान रूप से सुनी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस को भविष्य में मजबूत विकल्प के रूप में उभरना है, तो उसे आंतरिक संवाद को और सशक्त बनाते हुए हर वर्ग के नेताओं को भरोसे में लेना होगा।

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