
चंडीगढ़।
गुरु तेग बहादुर से जुड़ी कथित टिप्पणी के वीडियो को लेकर आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी और भाजपा नेता कपिल मिश्रा के बीच चल रहे विवाद में अब संवैधानिक टकराव के संकेत सामने आने लगे हैं। इस मामले में दिल्ली विधानसभा द्वारा भेजे गए नोटिस पर पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने सख्त और स्पष्ट जवाब दिया है। डीजीपी ने कहा है कि पंजाब पुलिस की जवाबदेही केवल न्यायालयों के प्रति है, न कि किसी विधानसभा के प्रति।
डीजीपी गौरव यादव का यह जवाब 21 जनवरी को पंजाब सरकार के गृह विभाग के माध्यम से दिल्ली विधानसभा को भेजा गया। जालंधर की पुलिस आयुक्त धनप्रीत कौर ने भी इसी आशय का जवाब दाखिल किया है।
अपने लिखित जवाब में डीजीपी ने स्पष्ट किया कि जालंधर कमिश्नरेट पुलिस द्वारा भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पूरी तरह कानून के दायरे में है। उन्होंने कहा कि संज्ञेय अपराध की स्थिति में एफआईआर दर्ज करना पुलिस का वैधानिक अधिकार और कर्तव्य है। इस कार्रवाई में किसी प्रकार की अवैधता या विशेषाधिकार उल्लंघन नहीं हुआ है।
डीजीपी ने दिल्ली विधानसभा द्वारा उठाए गए विधायी विशेषाधिकार के प्रश्न पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत दिए गए विशेषाधिकार केवल सदन के भीतर दिए गए भाषणों और सदन के आधिकारिक प्रकाशन तक ही सीमित होते हैं। कपिल मिश्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर किसी सदन के भीतर दिए गए वक्तव्य को लेकर नहीं, बल्कि सदन के बाहर एक कथित रूप से संपादित और भ्रामक वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में दर्ज की गई है।
डीजीपी के अनुसार, यह एफआईआर जालंधर निवासी एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि 7 जनवरी को सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो क्लिप में आतिशी को सिख गुरुओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिखाया गया, जबकि आतिशी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर मौजूद वीडियो में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं थी। इससे प्रथम दृष्टया यह संकेत मिला कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर मूल भाषण को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिसका उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को आहत करना और सांप्रदायिक तनाव फैलाना हो सकता है।
गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत 10 जनवरी को हुई थी, जब दिल्ली विधानसभा ने पंजाब के तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर तलब किया था। विधानसभा का आरोप था कि दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पंजाब पुलिस ने विधानसभा के विशेषाधिकारों का उल्लंघन किया है। वहीं, आतिशी ने शुरू से ही वीडियो को ‘डॉक्टर्ड’ बताते हुए आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक और संवैधानिक बहस का रूप ले चुका है, जिस पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही सामने आने की संभावना है।