Sunday, January 25

सपा की साइकिल से ज्यादा उड़ी पतंग! मुंबई में मुस्लिमों के नए ‘मसीहा’ बनते दिखे असदुद्दीन ओवैसी

मुंबई: महाराष्ट्र में मुंबई बीएमसी और 29 महानगरपालिका चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। पार्टी ने मुंबई और एमएमआर के कई पॉकेट में मजबूत पकड़ बनाई और कुल 126 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) का प्रदर्शन केवल दो सीटों तक सीमित रहा, जिससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मुंबई में मुस्लिमों का सपा से मोहभंग हो गया है।

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बीएमसी चुनाव में AIMIM ने गोवंडी इलाके में सेंधमारी करते हुए सात सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की। इसके अलावा, पार्टी ने एक नॉन-हिंदू पार्षद को भी बीएमसी में अपना नेता बनाया। इस जीत से यह स्पष्ट हुआ कि ओवैसी की पार्टी केवल मुस्लिम वोट बैंक तक ही सीमित नहीं रही बल्कि विविध समुदायों में भी अपनी पहचान बना रही है।

तीस दशक पहले मुंबई में दस्तक देने वाली सपा ने 1992-93 के दंगों के बाद मुस्लिम वोट बैंक में दबदबा बनाया था। उस समय समाजवादी पार्टी ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) से वोट हासिल किए थे। लेकिन 2026 के चुनावों में सपा केवल दो सीटों तक सिमट गई। इसके पीछे महाराष्ट्र अध्यक्ष अबु आसिम आजमी और पार्टी नेता रईस शेख के बीच टकराव को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

वरिष्ठ उर्दू पत्रकार सईद हमीद के अनुसार, बीएमसी चुनावों में मुस्लिम वोटिंग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कॉर्पोरेटर के तौर पर चुने गए 30 मुसलमानों में से केवल सात AIMIM से हैं, जबकि बाकी कांग्रेस, शिवसेना, NCP और SP के हैं। इसका मतलब यह है कि मुस्लिम मतदाता अभी भी सेक्युलर पार्टियों के साथ जुड़े हैं, लेकिन AIMIM की पकड़ धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।

मुंबई में ओवैसी की पार्टी के प्रमुख नेताओं में इम्तियाज शेख और वारिस पठान शामिल हैं। मुंब्रा से जीत हासिल करने वाली सहर शेख भी AIMIM से ही चुनावी मैदान में उतरी थीं। राजनीतिक विश्लेषक इसे मुंबई में सपा और अन्य पार्टियों के लिए सावधान करने वाला संकेत मान रहे हैं।

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