
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जाति आधारित जनगणना (Caste Census) को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गजट नोटिफिकेशन में जाति का कॉलम नहीं होने पर तीखी आलोचना की और कहा कि भाजपा जाति जनगणना नहीं करना चाहती।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जनगणना नोटिफिकेशन में जाति का उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि भाजपा आरक्षण के लिए जनसांख्यिकीय आधार तैयार नहीं करना चाहती। उन्होंने पीडीए समुदाय के अधिकारों और आरक्षण की लड़ाई खुद लड़ने की आवश्यकता भी बताई।
अखिलेश यादव का कहना:
नोटिफिकेशन में जाति कॉलम न होने के कारण गणना अधूरी रहेगी।
जातिगत जनगणना न करना भाजपा की स्पष्ट चाल है।
पीडीए समाज को अपने अधिकारों और आरक्षण के लिए स्वयं संघर्ष करना होगा।
भाजपा द्वारा पहले किए गए वादे झूठे और छलपूर्ण साबित हुए हैं।
क्या है जाति जनगणना?
जाति आधारित जनगणना में समाज के विभिन्न वर्गों और जातियों की संख्या और उनकी वितरण स्थिति का पता लगाया जाता है। यह आरक्षण और सामाजिक नीतियों के निर्धारण के लिए आधार बनती है। वर्ष 2020 में जनगणना-2021 के लिए आदेश जारी हुए थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे पूर्ण नहीं किया जा सका। अब सरकार ने जनगणना-2027 का नोटिफिकेशन जारी किया है।
जनगणना नोटिफिकेशन में यह सवाल शामिल है कि “क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य से संबंधित है?” इसके जरिए जातिगत जानकारी हासिल की जाएगी। इसके अलावा जनगणना में मकान, परिवार संरचना, पेयजल, शौचालय, बिजली, गैस कनेक्शन, वाहन, संचार और घरेलू उपभोग आदि से जुड़े कई प्रश्न शामिल हैं।
अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि नोटिफिकेशन में जाति का कॉलम न डालकर पीडीए समाज को अपमानित किया गया है और जनता को सही जानकारी से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि अब पीडीए समाज को अपने अधिकारों के लिए जागरूक होकर लड़ाई खुद ही लड़नी होगी।