Saturday, January 24

बांके बिहारी मंदिर में 10 किलो चांदी की देहरी का पूजन नहीं, कानूनी और परंपरागत विवाद में उलझा मामला

 

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वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में 10.5 किलो चांदी की नई देहरी (मुख्य द्वार की चौखट) को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वसंत पंचमी पर इसके विधिपूर्वक पूजन की योजना बनाई गई थी, लेकिन कानूनी नोटिस और मंदिर की परंपराओं का हवाला विवाद की वजह बना और अंततः पूजन नहीं हो पाया।

 

मंदिर कमेटी की 19 जनवरी को हुई बैठक में अध्यक्ष अशोक कुमार ने घोषणा की थी कि वसंत पंचमी के पावन अवसर पर सुबह 8:30 बजे कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य नई देहरी का पूजन करेंगे। लेकिन, इस योजना के तुरंत बाद, पूर्व अध्यक्ष गौरव गोस्वामी के अधिवक्ता संकल्प गोस्वामी ने कमेटी के अध्यक्ष और सचिव (मथुरा डीएम) को कानूनी नोटिस भेज दिया।

 

नोटिस में तर्क दिया गया कि देहरी पूजन ‘हरिदासी संप्रदाय’ की पारंपरिक और धार्मिक पूजा पद्धति है। इसे केवल संप्रदाय के सदस्य या विशेष दीक्षित भक्त ही कर सकते हैं। गैर-संप्रदाय सदस्य द्वारा पूजन करना मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं के खिलाफ है। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि जब आम भक्तों के लिए पूजन पर रोक है, तो कमेटी के सदस्य स्वयं यह विशेषाधिकार कैसे ले सकते हैं।

 

नोटिस के असर से शुक्रवार को प्रस्तावित समय पर कोई भी पूजन कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ। विवाद बढ़ता देख, कमेटी के सदस्य और मंदिर सेवायत दिनेश गोस्वामी ने कहा कि समिति का कोई आधिकारिक कार्यक्रम तय ही नहीं था। चर्चा है कि कानूनी पचड़े और सेवायतों के विरोध के डर से कमेटी ने आखिरी समय पर योजना वापस ले ली।

 

इस बीच नई देहरी लगाने के दौरान गर्भगृह से पांच पुरानी देहरियां भी मिलीं। इनमें चार चांदी की और एक गिलट की थी। मंदिर प्रबंधन ने इन ऐतिहासिक देहरियों को सुरक्षित रखने के लिए बैंक लॉकर में जमा कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

 

अब मंदिर में नई चांदी की देहरी चमक रही है, लेकिन इसके पूजन को लेकर विवाद फिलहाल शांत नहीं होता दिख रहा है।

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