
लंदन। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सैन्य प्रमुख असीम मुनीर कथित तौर पर गाजा में इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में अपने सैनिक भेजने पर सहमत हो गए हैं। इस निर्णय के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने की कोशिश बताई जा रही है, लेकिन इससे पाकिस्तान के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मान-सम्मान पर सवाल उठ रहे हैं।
ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी सेना के पूर्व मेजर आदिल राजा ने दावा किया कि पाकिस्तानी सैनिक इजरायल के मातहत गाजा में काम करेंगे। राजा के अनुसार, लगभग 4,000 पाकिस्तानी फौजी ISF का हिस्सा बनकर गाजा भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा, “यह वही पाकिस्तानी आर्मी है, जो यरुशलम जीतने और मस्जिद अल-अक्सा को आजाद कराने की बातें करती रही है, लेकिन अब इजरायल के सामने पूरी तरह झुक रही है।”
डोनाल्ड ट्रंप का ऑफर और पाकिस्तान का रोल:
आदिल राजा ने बताया कि ट्रंप ने पाकिस्तान को गाजा में मुस्लिम देशों की फोर्स का नेतृत्व करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें कई गल्फ देश भी शामिल हैं, लेकिन वे केवल वित्तीय मदद देंगे। असली काम—हमास से लड़ना और चौकीदारी—पाकिस्तानी फौज करेगी।
सरकार और सेना से सवाल:
आदिल राजा ने कहा कि शहबाज शरीफ और असीम मुनीर पाकिस्तानियों को यह बताने में विफल हैं कि वे इजरायल और अमेरिका के प्रति अपने वास्तविक कदमों को क्यों छुपा रहे हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार और सेना को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वे डॉलर के लालच में अमेरिका और इजरायल के तलवे चाट रहे हैं।
चीन से दूरी और अमेरिका की ओर रुख:
राजा ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अब चीन से दूर होकर पूरी तरह अमेरिका की गोद में बैठ रहा है। पाकिस्तान ने पिछले वर्षों में कई चीनी निवेश और परियोजनाओं के माध्यम से लाभ उठाया, लेकिन अब उसकी नीति बदल रही है और वह चीनी ऋण लेने से भी बचने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की यह नीति देश की विदेश नीति, आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रतिष्ठा पर लंबी अवधि में गहरा असर डाल सकती है।