
वॉशिंगटन। भूगर्भ वैज्ञानिकों ने अफ्रीका महाद्वीप के नीचे हो रही असाधारण हलचल का खुलासा किया है, जिसके चलते महाद्वीप धीरे-धीरे दो हिस्सों में टूट रहा है। नई स्टडी के अनुसार, ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट (EAR) के क्षेत्र में सोमालियन प्लेट पूर्वी नूबियन प्लेट से अलग हो रही है, और भविष्य में इस दरार के बीच एक नया महासागर बन सकता है।
धीरे–धीरे बढ़ रही दरार:
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह प्रक्रिया फिलहाल धीमी है और महाद्वीप के पूरी तरह टूटने में लाखों साल लगेंगे। हर साल प्लेटें लगभग 0.28 इंच दूर जा रही हैं। न्यूबियन और सोमालियन प्लेटें उत्तर अरेबियन प्लेट से अलग होकर Y आकार का रिफ्टिंग सिस्टम बना रही हैं। यह संरचना इथियोपिया के अफार क्षेत्र में मिलती है, जिसे ट्रिपल जंक्शन कहा जाता है। यह धरती की उन दुर्लभ जगहों में से एक है जहां तीन टेक्टोनिक रिफ्ट एक-दूसरे से मिलते हैं—इथियोपियन रिफ्ट, रेड सी रिफ्ट और गल्फ ऑफ अदन।
समुद्र का पानी प्लेटों के बीच जाने लगेगा:
वर्जीनिया टेक की जियोफिजिस्ट डी. सारा स्टैम्पस के अनुसार, दरार उत्तर की ओर सबसे तेज़ी से बढ़ रही है। इथियोपिया के अफार इलाके में ऊपरी परत पहले से पतली है और जमीन का कुछ हिस्सा समुद्र तल से नीचे है। जैसे ही घाटी और गहरी होगी, अलग हो रही प्लेटों के बीच समुद्र का पानी प्रवेश करने लगेगा और नया महासागर बनने की प्रक्रिया शुरू होगी।
भूकंप और ज्वालामुखी का खतरा:
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह दरार भूकंप और ज्वालामुखी जैसी गतिविधियों के जरिए धरती पर जीवन को प्रभावित कर सकती है। पृथ्वी की ऊपरी परत लगभग 15-20 टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है, जो नीचे पिघले हुए मैग्मा की सतह पर तैरती हैं। अफार क्षेत्र के नीचे एक मेंटल प्लम मौजूद है, जो गर्म पदार्थ का स्तंभ ऊपर की ओर उठाता है और प्लेटों को फोड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह भूगर्भीय घटना पृथ्वी के भूगोल को भविष्य में पूरी तरह बदल सकती है और अफ्रीका महाद्वीप का नया महासागर धीरे-धीरे आकार लेगा।