
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर बढ़ते समर्थन से बौखलाए पाकिस्तान ने अब खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को वीटो पावर दिए जाने का विरोध किया और भारत के सिंधु जल संधि पर रोक लगाने के कदम को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताते हुए उठाया।
गुरुवार को आयोजित इंटरनेशनल लॉ ईयर इन रिव्यू 2026 सम्मेलन में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि संधियों का चुनिंदा पालन और अंतरराष्ट्रीय कानून का असमान अनुप्रयोग संयुक्त राष्ट्र की नींव को कमजोर करता है। उन्होंने भारत के कदम को “परेशान करने वाला रुझान” करार दिया और कहा कि ऐसे कार्य अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं।
सिंधु जल संधि पर विरोध:
आसिम ने कहा कि बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौतों को न मानना UNSC और वैश्विक प्रणाली के लिए चुनौती है। उन्होंने भारत द्वारा सिंधु जल संधि पर रोक लगाने का जिक्र करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी करार दिया।
वीटो पावर पर विरोध:
पाकिस्तान ने UNSC सुधार में नए सदस्यों को वीटो देने का भी विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सुधार मौजूदा संरचना के दोषों को और गहरा नहीं कर सकता। हालांकि, भारत का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन यह कदम नई दिल्ली के लिए स्पष्ट संदेश है।
भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन:
भारत लंबे समय से UNSC सुधार और अपनी स्थायी सदस्यता के लिए सक्रिय रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह तर्क दिया है कि वर्तमान सुरक्षा परिषद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के शक्ति संतुलन पर आधारित है, जबकि दुनिया बदल चुकी है। भारत को स्थायी सदस्यता देने के पक्ष में ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और अमेरिका का समर्थन भी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान का यह विरोध भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और दक्षिण एशिया में प्रभाव को लेकर चिंता जताता है।