
यूरोपियन यूनियन (EU) को पीछे छोड़ते हुए दक्षिण कोरिया ने दुनिया का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बेसिक एक्ट पेश कर दिया है। नए कानून के तहत कंपनियों को ग्राहकों को पहले से बताना होगा कि वे AI आधारित प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा, AI से बनी सभी चीजों पर स्पष्ट लेबल या वॉटरमार्क लगाना अनिवार्य होगा।
AI बेसिक एक्ट क्या है?
दक्षिण कोरिया के नए AI कानून के अनुसार, कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल पर इंसानी निगरानी अनिवार्य होगी। इनमें परमाणु सुरक्षा, पीने के पानी का उत्पादन, यातायात, स्वास्थ्य सेवाएं और वित्तीय लेनदेन शामिल हैं।
AI कंपनियों को ग्राहकों को पहले से सूचित करना होगा और AI से बनी चीजों को पहचानने योग्य बनाना होगा। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि AI जनित कंटेंट कभी-कभी असली जैसी दिखती है और लोगों के लिए इसे अलग पहचानना मुश्किल हो जाता है।
स्टार्टअप्स में विरोध
स्थानीय स्टार्टअप्स नए कानून को लेकर असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि “हमें दुनिया में पहला क्यों बनना पड़ा?” हालांकि नियमों में एक साल की छूट दी गई है, जिसमें अनुपालन न करने पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। स्टार्टअप अलायंस के सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 2% AI केंद्रित स्टार्टअप्स के पास औपचारिक अनुपालन योजना है। आधे स्टार्टअप्स का कहना है कि वे नए कानून को पूरी तरह नहीं समझते।
स्टार्टअप अलायंस के सह-प्रमुख लिम जंग-वूक का कहना है कि कानून की अस्पष्टता के कारण संस्थापक अत्यधिक सतर्क डेवलपमेंट नीति अपनाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
जुर्माने और सरकारी सहायता
विज्ञान और आईसीटी मंत्रालय (MSIT) ने AI Act सपोर्ट डेस्क लॉन्च किया है। यह डेस्क कंपनियों को नियमों के पालन और नियामक स्थिति तय करने में मदद करेगी। यदि कंपनियां छूट अवधि के बाद नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उन्हें 30 मिलियन वॉन (लगभग 20,400 डॉलर) तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि यह यूरोपीय संघ के ढांचे की तुलना में कम है।
कानून से मिलेगी मजबूती
दक्षिण कोरिया का लक्ष्य AI क्षेत्र में खुद को एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना है। नया कानून AI विकास को बढ़ावा देने और संभावित जोखिमों को कम करने की दिशा में एक अहम कदम है। हालांकि, स्टार्टअप्स की चिंताओं को दूर करना और उन्हें नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण देना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।