
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर नौकरी के झांसे में फंसना भारतीय युवाओं के लिए भारी पड़ सकता है। विदेश में अच्छी कमाई का लालच देकर चार आईटी प्रोफेशनल्स को म्यांमार ले जाकर वहां जबरन साइबर अपराध कराए गए।
नौकरी का झांसा और विश्वास जीतना
पीड़ितों ने बताया कि इंस्टाग्राम पर डेटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी के विज्ञापन देख कर उन्होंने लिंक पर क्लिक किया। लिंक के जरिए उन्हें एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया और सुरक्षित विदेशी नौकरी, अच्छे वेतन और शानदार रहने की सुविधा का भरोसा दिलाया गया। पासपोर्ट बनवाने के लिए कहा गया और जिनके पास पैसे नहीं थे, उनके अकाउंट में 10,000 रुपये भेजे गए।
थाईलैंड से म्यांमार तक का डरावना सफर
पासपोर्ट बन जाने के बाद युवाओं को फ्लाइट टिकट भेजकर थाईलैंड बुलाया गया। वहां उन्हें फाइव-स्टार होटल में ठहराया गया, फिर छह–सात बार गाड़ी बदलकर म्यांमार ले जाया गया। एक छोटे से कस्बे के कंपाउंड में 400–450 अन्य भारतीय युवाओं के साथ रखा गया। पीड़ितों ने बताया कि यह ऑपरेशन चीनी लोगों द्वारा संचालित था।
साइबर धोखाधड़ी और क्रिप्टो निवेश का जाल
पीड़ितों को लगभग एक महीने की ट्रेनिंग दी गई और फिर साइबर धोखाधड़ी के काम में लगाया गया। महिलाओं की AI से बनाई गई फोटो वाली फेसबुक प्रोफाइल का इस्तेमाल कर अमेरिका और कनाडा में रहने वाले भारतीयों से संपर्क कराया गया। उन्हें हाई रिटर्न के लालच में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कराना पड़ता था।
पासपोर्ट जब्त और धमकियां
काम से मना करने या लक्ष्य पूरा न करने पर पीड़ितों को मानसिक उत्पीड़न और धमकियां दी गईं। खाना-पानी बंद कर दिया जाता था। पासपोर्ट और दस्तावेज़ जब्त कर लिए गए, जिससे भागने का कोई रास्ता नहीं था। रिहाई के लिए प्रति व्यक्ति 4–5 लाख रुपये की मांग भी की गई।
मियांमार से भारत वापसी
चारों युवाओं ने किसी तरह अपनी जान बचाई और भारत लौटने में सफल रहे। इस दौरान म्यांमार की सेना के एक ऑपरेशन ने उनकी रिहाई सुनिश्चित की, जबकि चीनी ऑपरेटर मौके से फरार हो गए।
पुलिस और साइबर क्राइम एजेंसियों की चेतावनी
केंद्र और राज्य की एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं। स्थानीय साइबर क्राइम पुलिस ने युवाओं और अभिभावकों को इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर अनजान नौकरी लिंक से दूर रहने की सलाह दी है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और पासपोर्ट मांगने वाले ऑफर से सतर्क रहें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।