
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच इसी महीने 26 जनवरी के आसपास दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेड डील की घोषणा होने की संभावना है। लेकिन उससे पहले यूरोप ने भारत को एक बड़ा झटका दिया है। EU ने भारत के कुछ सामान पर एक्सपोर्ट बेनिफिट्स रोक दिए हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित होने की आशंका है।
कौन से सामान प्रभावित हैं:
इस फैसले के तहत कपड़े, गहने, रसायन, प्लास्टिक, धातु और ट्रांसपोर्ट के सामान शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पहले भारतीय निर्यातकों को टैरिफ में लगभग 20% का फायदा मिलता था, जो अब खत्म हो गया है।
GSP का महत्व और बदलाव:
GSP (Generalized Scheme of Preferences) एक ऐसी स्कीम है जिसके तहत विकसित देश विकासशील देशों के सामान पर कम टैरिफ लगाते हैं, ताकि उनके निर्यात को बढ़ावा मिले। हालांकि 1 जनवरी 2026 से भारत के कुछ सामान पर GSP के तहत मिलने वाले टैरिफ बेनिफिट्स सस्पेंड रहेंगे।
उदाहरण के लिए कपड़े के उत्पाद पर पहले 12% टैक्स लगता था, लेकिन GSP के तहत इसे सिर्फ 9.6% देना पड़ता था। अब GSP का फायदा खत्म होने से निर्यातकों को पूरा 12% ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) ड्यूटी चुकानी होगी।
भारत का जवाब और असर:
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि पुरानी व्यवस्था का हिस्सा है। फिर भी FIEO के महानिदेशक अजय सहाय का कहना है कि इस फैसले से भारतीय निर्यातकों की कीमत प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर होगी, खासकर बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले, जो अब भी तरजीही पहुंच का फायदा उठा रहे हैं।
परिस्थिति का विश्लेषण:
2016 से EU धीरे-धीरे भारत के कई सामान पर GSP बेनिफिट्स कम करता रहा है। वित्त वर्ष 2025 में भारत से EU को होने वाले कुल निर्यात का लगभग 47% हिस्सा GSP के दायरे से बाहर हो गया है। केवल 53% निर्यात (लगभग 40.2 अरब डॉलर) ही अब भी GSP के तहत आता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अब अपने निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए अन्य देशों और बाज़ारों में अवसर तलाशने होंगे, ताकि अमेरिका, बांग्लादेश और वियतनाम के मुकाबले भारतीय निर्यात मजबूत बना रहे।