
नई दिल्ली, 22 जनवरी।
ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित पर्व बसंत पंचमी इस वर्ष 23 जनवरी 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह दिन स्कूली बच्चों और छात्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस अवसर पर विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में सरस्वती पूजा और वंदना का आयोजन अनिवार्य रूप से किया जाता है।
बसंत पंचमी को आमतौर पर सरस्वती पूजा के नाम से जाना जाता है। इस दिन विद्यार्थी मां सरस्वती से विद्या, विवेक और सफलता का आशीर्वाद मांगते हैं। स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान सबसे अधिक गाई जाने वाली वंदना है—
‘या कुंदेन्दु तुषार हार धवला…’
हालांकि यह श्लोक प्रायः संस्कृत में गाया जाता है, लेकिन इसके भाव और अर्थ से बहुत-से विद्यार्थी अनजान रहते हैं।
सरस्वती वंदना (संस्कृत श्लोक)
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
हिंदी अर्थ
जो कुमुद (सफेद कमल), चंद्रमा और हिम के हार के समान निर्मल और उज्ज्वल हैं।
जो शुभ्र वस्त्र धारण करती हैं।
जिनके हाथों में वीणा और आशीर्वाद देने वाली मुद्रा सुशोभित है।
जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं।
जिनकी वंदना ब्रह्मा, विष्णु और महादेव जैसे देवता भी करते हैं।
वह भगवती मां सरस्वती, जो समस्त अज्ञान और जड़ता को दूर करने वाली हैं,
मुझे विद्या और ज्ञान प्रदान कर मेरी रक्षा करें।
एक अन्य प्रसिद्ध सरस्वती वंदना
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
हिंदी भावार्थ
मैं उस परमेश्वरी भगवती सरस्वती की वंदना करता/करती हूं,
जो शुद्धता और पवित्रता की प्रतीक हैं।
जो ज्ञान और ब्रह्मविचार की साररूपा आद्य शक्ति हैं।
जो संपूर्ण जगत में व्याप्त हैं।
जिनके हाथों में वीणा और पुस्तक सुशोभित हैं।
जो निर्भयता प्रदान करती हैं और अज्ञान के अंधकार को दूर करती हैं।
जो कमलासन पर विराजमान हैं और बुद्धि, विवेक व ज्ञान प्रदान करती हैं।
बसंत पंचमी का संदेश
बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन और सकारात्मक सोच का उत्सव है। सरस्वती वंदना का सही अर्थ समझकर उसका गायन करने से श्रद्धा और भाव और अधिक प्रगाढ़ हो जाते हैं। यह दिन विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, आगे बढ़ने और अपने जीवन को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करने की प्रेरणा देता है।