
नई दिल्ली: सफलता की तस्वीर बाहर से जितनी शानदार दिखाई देती है, पीछे उतनी ही मेहनत और संघर्ष छिपा होता है। मनीष चौधरी की कहानी इसी बात का उदाहरण है।
दिवालियापन से दुनिया के बड़े ब्रांड तक
मनीष चौधरी, WOW Skin Science के को-फाउंडर, 29 साल की उम्र में दिवालिया हो गए थे। उस समय उनके ऊपर 6.5 करोड़ रुपये का भारी कर्ज था। एक असफल बिजनेस ने उन्हें पैसों और कानूनी झंझटों के दबाव में ला दिया। लेकिन कई लोगों के लिए यह अंत हो सकता था, मनीष ने इसे नई शुरुआत का अवसर बनाया।
कॉर्पोरेट नौकरियों में काम करते हुए, उन्होंने छोटे बिजनेस आइडियाज के साथ प्रयोग शुरू किया। उनका मकसद मुनाफा कमाना नहीं बल्कि सीखना और अनुभव जुटाना था। उन्होंने समझा कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस, ग्राहक व्यवहार, प्राइसिंग और लॉजिस्टिक्स कैसे बिक्री को प्रभावित करते हैं।
WOW Skin Science की शुरुआत
2014 में बेंगलुरु से WOW Skin Science की शुरुआत हुई। इसे बिना किसी बाहरी फंडिंग के, केवल अपने संसाधनों से शुरू किया गया। ब्रांड ने छोटी प्रोडक्ट रेंज से शुरुआत की, जिसमें मुख्य रूप से शैम्पू और स्किनकेयर आइटम थे। फिजिकल स्टोर खोलने के बजाय, कंपनी ने शुरुआत से ही ऑनलाइन बिक्री पर जोर दिया।
मनीष ने भारतीय ग्राहकों के लिए नेचुरल और इंग्रेडिएंट–बेस्ड ब्यूटी प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराए। उन्होंने देखा कि विदेशी पर्सनल-केयर ब्रांड्स के लिए ग्राहक बहुत ज्यादा पैसा दे रहे थे, जबकि भारत में भरोसेमंद देसी ब्रांड्स की कमी थी। यही उनके ब्रांड का मूल उद्देश्य बन गया।
D2C मॉडल से कमाई का जादू
WOW Skin Science का डायरेक्ट–टू–कंज्यूमर (D2C) मॉडल इसकी सफलता का प्रमुख कारण है। ब्रांड ने डिस्ट्रीब्यूटर्स और रिटेलर्स पर निर्भर रहने के बजाय, सीधे अपने ग्राहकों को बेचना शुरू किया।
आज WOW Skin Science भारत में घर–घर का जाना–माना नाम है और इसके उत्पाद अमेरिका, मध्य-पूर्व और यूरोप में भी उपलब्ध हैं। अनुमानित तौर पर कंपनी की सालाना कमाई 300 करोड़ रुपये से अधिक है, और इसकी वैल्यूएशन 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जा रही है।
मनीष चौधरी की कहानी यह साबित करती है कि संकट और असफलता के समय धैर्य और मेहनत ही सफलता की कुंजी हैं।