
नई दिल्ली, 22 जनवरी।
ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित पर्व बसंत पंचमी इस वर्ष 23 जनवरी 2026 को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि ऋतुराज बसंत के आगमन का संदेश भी देता है। इसी अवसर पर देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और सांस्कृतिक संस्थानों में निबंध एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। विद्यार्थियों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है।
बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं, मां सरस्वती की आराधना करते हैं और ज्ञान, बुद्धि व रचनात्मकता के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।
बसंत पंचमी पर 10 पंक्तियाँ (निबंध और भाषण के लिए)
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बसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है।
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यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, जिसे ऋतुओं का राजा कहा जाता है।
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बसंत पंचमी का मुख्य महत्व मां सरस्वती की पूजा से जुड़ा हुआ है।
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इस दिन स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में विशेष पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
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पीला रंग बसंत पंचमी का प्रमुख रंग है, जो उल्लास और समृद्धि का प्रतीक है।
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इस दिन नए कार्यों और शिक्षा की शुरुआत को शुभ माना जाता है।
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बसंत पंचमी का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक भी है।
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यह पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।
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बसंत ऋतु की तरह यह त्योहार जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह भरता है।
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बसंत पंचमी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा का प्रतीक है।
बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी शिक्षा, संस्कृति और सकारात्मक शुरुआत से जुड़ा पर्व है। इस दिन विद्यार्थी और विद्वान मां सरस्वती से ज्ञान, एकाग्रता और सफलता की कामना करते हैं। प्रकृति के खिलने के साथ यह पर्व हमें अपने जीवन में संतुलन, सौंदर्य और सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा देता है।
बसंत पंचमी न केवल एक त्योहार है, बल्कि यह संदेश है—
सीखते रहने, आगे बढ़ते रहने और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने का।