Thursday, June 18

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सेंट्रल इंडिया कॉरिडोर के माध्यम से चीन तक वन्यजीव तस्करी, झारखंड-बिहार-छत्तीसगढ़ से 61 तस्कर गिरफ्तार

 

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मेदिनीनगर: वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो और पलामू व्याघ्र परियोजना की संयुक्त टीम ने 18 से 20 जनवरी तक विशेष अभियान चलाकर तीन राज्यों झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ से 61 वन्यजीव तस्करों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में वन्यजीवों के अवशेष, तस्करी में प्रयुक्त वाहन और हथियार बरामद किए गए।

 

पलामू व्याघ्र परियोजना के उप निदेशक प्रजेश कांत जेना ने बताया कि इस अभियान के दौरान मेदिनीनगर, लातेहार, गढ़वा, जमशेदपुर, रांची, गुमला और पालकोट के डीएफओ, छत्तीसगढ़ के कुसमी, जशपुर, बलरामपुर और डीएसयूएस व्याघ्र आरक्ष तथा बिहार के दरभंगा-बांका के वन अधिकारी शामिल थे।

 

संयुक्त कार्रवाई के दौरान झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों से करीब 60 किलोग्राम पैंगोलिन का छाल बरामद किया गया। इसके अलावा रांची और बक्सर से रेड सैंड बोआ सांप, जमशेदपुर से दो किलो मूंगा, दरभंगा से एक तेंदुए की खाल और हजारीबाग-पलामू से सांप के जहर की दो बोतलें जब्त की गईं। पीटीआर क्षेत्र से देसी हथियार, मोर के पैर, बाघ की हड्डी का संभावित पाउडर, एक स्कॉर्पियो वाहन, मोटरसाइकिल और गुलेल भी बरामद हुए।

 

उप निदेशक जेना ने बताया कि बरामद खाल और सांप के जहर का उपयोग चीन में औषधि निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है। यह तस्करी सेंट्रल इंडिया कॉरिडोर के माध्यम से नेपाल, बंगाल और म्यांमार होते हुए चीन तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि इस अवैध धंधे की मांग इतनी अधिक है कि एक गिरोह के पकड़े जाने पर दूसरा सक्रिय हो जाता है। भारत और चीन दोनों ही वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन के सदस्य हैं, इसलिए इस गंभीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उठाया जाएगा।

 

उप निदेशक ने आगे बताया कि भविष्य में सिर्फ अपराधियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि उन्हें कानून के तहत सजा दिलाना भी प्राथमिकता होगी। इसके लिए पुलिस, फोरेंसिक और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। अभियोजन को मजबूत बनाने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जोड़ा जाएगा।

 

वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पलामू के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में सुरक्षा प्रहरियों को स्वचालित हथियारों से लैस करने की योजना है। इसके साथ ही एसटीएफ की तर्ज पर विशेष सेल के गठन पर भी काम चल रहा है। उप निदेशक ने कहा कि बल प्रयोग के साथ-साथ सामुदायिक जागरूकता भी वन संरक्षण की दिशा में बेहद जरूरी है।

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