
रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद में बहुचर्चित पंकज सिंह हत्याकांड में करीब एक दशक बाद न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) द्वितीय प्रतिमा तिवारी की अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप सिद्ध न कर पाने के चलते नामजद सभी पांच अभियुक्तों को बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहे।
गौरतलब है कि पंकज सिंह की मौत 25 जनवरी 2016 को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने मुकुट सिंह, अभय, अंकित फास्टर, धनंजय और अजय के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। मामला गंभीर और संवेदनशील होने के कारण लंबे समय तक चर्चा में रहा तथा करीब 10 वर्षों तक इसका ट्रायल चला।
साक्ष्य साबित करने में विफल रहा अभियोजन
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई गवाह अदालत में पेश किए गए, लेकिन उनके बयान ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से पुष्ट नहीं हो सके। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष कथानक को पूरी तरह स्थापित करने में असफल रहा, जिससे आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो पाए।
बचाव पक्ष की प्रभावी पैरवी
अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमिताभ त्रिपाठी और सर्वेंद्र सिंह उर्फ ‘बन्ना’ ने अदालत में प्रभावी पैरवी की। उन्होंने गवाहों के विरोधाभासी बयानों, साक्ष्यों के अभाव और जांच की खामियों की ओर अदालत का ध्यान आकृष्ट किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।
फैसले पर प्रतिक्रिया
फैसले के बाद अभियुक्त पक्ष में संतोष का माहौल देखने को मिला। अधिवक्ता अमिताभ त्रिपाठी ने बताया कि शुरुआत में एफआईआर में छह लोगों के नाम दर्ज थे, लेकिन जांच के दौरान एक आरोपी का नाम हटा दिया गया था। शेष पांच अभियुक्तों को भी साक्ष्य के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।
इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि आपराधिक मामलों में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया की रीढ़ होते हैं। लंबे समय से चले इस मुकदमे के पटाक्षेप के बाद न्यायालय परिसर में भी फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा।