Thursday, January 22

माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर प्रवेश प्रतिबंध का खतरा, दूसरी नोटिस जारी

 

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प्रयागराज: प्रयागराज माघ मेला 2026 में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को माघ मेला प्राधिकरण की ओर से दूसरी नोटिस जारी की गई है। इस नोटिस में प्रशासन ने कड़ी चेतावनी दी है और भविष्य में मेले में प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की बात कही है।

 

माहौल तब गरमा गया जब मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम नोज तक पालकी से जाने पर अड़चन दिखाई। प्रशासन और स्वामी के अनुयायियों के बीच करीब तीन घंटे तक खींचतान जारी रही। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें लगातार पैदल संगम नोज तक जाने का अनुरोध किया, लेकिन शंकराचार्य अपने निर्णय पर अड़े रहे। इस दौरान उनके समर्थकों ने बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास किया।

 

दूसरी नोटिस में क्या कहा गया है

प्राधिकरण ने 18 जनवरी को जारी नोटिस में बताया कि मौनी अमावस्या के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों में उपयोग में लाए जाने वाले पांटून पुल नंबर 2 पर लगे बैरियर तोड़े गए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना अनुमति बग्घी में बैठकर संगम क्षेत्र की ओर जा रहे थे। प्रशासन ने कई बार घोषणा की थी कि भीड़ और सुरक्षा के कारण वाहन निषिद्ध हैं, लेकिन इस दौरान लाखों स्नानार्थी संगम में स्नान कर रहे थे।

 

नोटिस में कहा गया है कि इस प्रकार का प्रवेश भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है और इससे मेला व्यवस्था प्रभावित हुई। इसके साथ ही, स्वामी ने अपने आपको शंकराचार्य बताते हुए मेले में बोर्ड और अन्य चिन्ह लगाए, जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आधिकारिक रूप से उन्हें शंकराचार्य घोषित करने पर रोक है।

 

प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण न मिलने पर उनके मेला प्रवेश को स्थायी रूप से प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया जा सकता है। नोटिस आश्रमों सहित संबंधित शिविर संचालकों के नाम पर जारी की गई है।

 

पहली नोटिस का जवाब

इस बीच, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से मेला प्राधिकरण की पहली नोटिस का जवाब भी दे दिया गया है। उनके वकील अंजनी कुमार मिश्र ने आठ पृष्ठ का जवाब दाखिल कर नोटिस वापस लेने की मांग की। जवाब में कहा गया कि शंकराचार्य का पट्टाभिषेक पहले ही संपन्न हो चुका था और बाद में जारी आदेश का कोई प्रभाव नहीं है। वकील ने चेतावनी दी कि नोटिस वापस न लिए जाने पर कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की जाएगी और अन्य विधिक कार्रवाई की जाएगी।

 

 

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