
नई दिल्ली।
क्रिकेट के मैदान पर भारत और पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता हमेशा चर्चा में रहती है, लेकिन अब यह टकराव खेल से निकलकर विज्ञापनों और सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ प्रस्तावित घरेलू टी20 सीरीज के प्रचार के लिए जारी एक प्रोमो वीडियो में भारत को लेकर विवादित टिप्पणी कर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है।
PCB द्वारा जारी इस वीडियो में हाल ही में हुए भारत–पाकिस्तान ‘नो–हैंडशेक’ विवाद का जिक्र करते हुए तंज कसा गया है, जिसे खेल भावना के खिलाफ बताया जा रहा है।
प्रोमो वीडियो में क्या दिखाया गया?
प्रोमो वीडियो में पाकिस्तान की मेहमाननवाज़ी और क्रिकेट संस्कृति को दर्शाया गया है। वीडियो के एक दृश्य में एक ऑस्ट्रेलियाई प्रशंसक टैक्सी ड्राइवर से बातचीत करता नजर आता है। जब वह उतरने लगता है, तो ड्राइवर उर्दू में कहता है—
“हैंडशेक भूल गए आप, लगता है पड़ोसियों के पास भी रुके थे।”
इस संवाद को भारत की उस हालिया नीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तान के खिलाफ मैचों के बाद हाथ मिलाने से परहेज किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संवाद सीधे तौर पर भारत पर निशाना साधने की कोशिश है।
क्यों हुआ था हैंडशेक विवाद?
भारत और पाकिस्तान के बीच हाथ न मिलाने का मुद्दा 2025 एशिया कप के दौरान सामने आया था। पुरुष टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव और महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पाकिस्तान के खिलाफ जीत के बाद हाथ नहीं मिलाया था।
बाद में सूर्यकुमार यादव ने स्पष्ट किया था कि यह फैसला भारत में हुए आतंकी हमलों, विशेष रूप से पहलगाम हमले के पीड़ितों और भारतीय सशस्त्र बलों के सम्मान में लिया गया था। उन्होंने इसे भावनात्मक और राष्ट्रीय संवेदनाओं से जुड़ा निर्णय बताया था।
मार्केटिंग के नाम पर विवाद?
खेल जगत के जानकारों का मानना है कि PCB ने इस संवेदनशील मुद्दे का इस्तेमाल केवल अपनी टी20 सीरीज को सुर्खियों में लाने के लिए किया है। वीडियो में पाकिस्तान के टी20 कप्तान सलमान अली आगा भी दिखाई देते हैं, जो विदेशी पर्यटकों का स्वागत करते नजर आते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले ऐसे विवाद भड़काना खेल भावना और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की मर्यादा के खिलाफ है।
पाकिस्तान की इस हरकत को सोशल मीडिया पर भी तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, जहां कई प्रशंसकों ने इसे “अनावश्यक उकसावे” और “नकारात्मक प्रचार” करार दिया है।