Thursday, January 22

सरहद से कर्तव्य पथ तक: 26 जनवरी पर इतिहास रचेंगी 26 साल की सिमरन, पुरुष CRPF टुकड़ी का नेतृत्व करेंगी

26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की परेड में कर्तव्य पथ पर चलेंगी सिमरन बाला, यह कोई साधारण क्षण नहीं होगा। जम्मू और कश्मीर के नौशेरा की 26 वर्षीय इस बेटी ने न सिर्फ अपने क्षेत्र बल्कि पूरे देश की बेटियों के लिए मिसाल कायम की है।

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सीमा पर गोलीबारी देखकर ठानी थी फोर्स में शामिल होना
सिमरन बाला का जन्म 10 दिसंबर 1999 को जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा में हुआ। सीमा पार से होती गोलीबारी देखकर उन्होंने ठाना कि अगर देश की सेवा करनी है तो फोर्स में जाना होगा। इस जुनून के साथ उन्होंने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) परीक्षा 2021 दी और पहले ही प्रयास में 85वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल कर CRPF में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में शामिल हुईं। वे जम्मू और कश्मीर की पहली लड़की हैं जिन्होंने UPSC CAPF एग्जाम पास कर फोर्स जॉइन किया।

पहली पोस्टिंग नक्सल प्रभावित इलाके में
सिमरन की पहली पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जंगलों में हुई, जहां उन्होंने ‘बस्तरिया बटालियन’ में शामिल होकर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेवा दी। इस बटालियन में शामिल होना केवल उन जवानों के लिए है, जो घने जंगल और कठिन हालात में काम करने के लिए तैयार हों।

पुरुष CRPF टुकड़ी का नेतृत्व
गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान सिमरन बाला पुरुष CRPF मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व करेंगी। यह पहली बार होगा जब कोई महिला अधिकारी इस पद पर होगी। उन्हें यह सम्मान कड़ी रिहर्सल में उनकी उत्कृष्ट प्रदर्शन, आत्मविश्वास और ड्रिल में सटीकता के कारण मिला।

नारी शक्ति और जम्मूकश्मीर की बदलती तस्वीर का प्रतीक
26 जनवरी को सिमरन बाला कर्तव्य पथ पर मार्च करती नजर आएंगी, यह दृश्य भारतीय सेना में बढ़ती नारी शक्ति और जम्मू-कश्मीर की बदलती गौरवशाली तस्वीर का प्रतीक होगा। यह पल यह भी दिखाएगा कि वर्दी वाली महिलाओं की अगली पीढ़ी के लिए नए रास्ते खुले हैं और नेतृत्व पूरी योग्यता के आधार पर पहचाना जाता है।

सिमरन की यह कहानी न केवल देश के जवानों के लिए प्रेरणा है, बल्कि हर उस बेटी के लिए भी मिसाल है, जो अपने सपनों को साकार करना चाहती है।

 

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