
नई दिल्ली: समाज में आज भी कई परिवारों में बेटा ही परिवार का भविष्य माना जाता है, जबकि बेटियां बराबर की योग्यता और सम्मान की हकदार हैं। एक ऐसा ही मामला हाल ही में सामने आया, जहां एक महिला ने अपने चौथे सिजेरियन ऑपरेशन के बाद भी परिवार के दबाव के कारण नसबंदी नहीं कराई।
गाइनकोलॉजिस्ट डॉ. सोनिया गुप्ता के अनुसार, साइंटिफिक दृष्टि से एक महिला अधिकतम दो सिजेरियन ऑपरेशन से सुरक्षित रूप से बच्चों को जन्म दे सकती है। दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में यह संख्या तीन तक बढ़ सकती है। अधिक ऑपरेशन से महिला की बच्चेदानी कमजोर हो जाती है और ऑपरेशन के दौरान या बाद में गंभीर जोखिम बढ़ सकते हैं।
मामला ऐसा था:
डॉ. सोनिया ने महिला के चौथे सिजेरियन ऑपरेशन से पहले परिवार से कहा कि इसी दौरान बच्चा बंद करने का (नसबंदी) ऑपरेशन भी करवा लें। लेकिन परिवार ने कहा, “नहीं, जब बेटा पैदा होगा तभी नसबंदी कराएंगे। वरना पांचवां ऑपरेशन कराना पड़ेगा।”
डॉ. सोनिया ने इस पर सवाल उठाया, “क्या बेटियां पर्याप्त नहीं हैं? बेटियां भी पढ़–लिख रही हैं, अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं और किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं हैं। फिर भी समाज में बेटे की चाह में मां पर बार–बार ऑपरेशन का दबाव बनाया जाता है। क्या यह सही है?”
डॉ. सोनिया ने आगे बताया कि सिजेरियन ऑपरेशन की संख्या बढ़ने पर मां की जान को भी खतरा हो सकता है। प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग, बच्चेदानी फटना या ऑपरेशन के दौरान गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए परिवार को चाहिए कि बेटे की चाह में महिला की सेहत को जोखिम में न डालें।
इस मामले में सौभाग्य रहा कि महिला के चौथे ऑपरेशन में पुत्र का जन्म हुआ, वरना मां को अत्यधिक जोखिम उठाना पड़ सकता था।
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