
ब्रुसेल्स: यूरोपीय संघ (EU) सुरक्षा चिंताओं के कारण अपने महत्वपूर्ण नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर से चीन में बने उपकरणों को हटाने की योजना बना रहा है। इसका असर Huawei और ZTE जैसी कंपनियों पर पड़ेगा, जिनके उपकरण अब ईयू में टेलीकॉम नेटवर्क, सोलर एनर्जी सिस्टम और सुरक्षा स्कैनर में इस्तेमाल नहीं किए जा सकते।
क्या है प्रस्ताव?
ईयू की योजना हाई रिस्क वाले सप्लायर्स को अपने नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर से बाहर रखने की है। अमेरिकी मॉडल की तरह, यूरोप भी चीन के उपकरणों को राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रतिबंधित करने जा रहा है। अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने पहले ही Huawei और ZTE पर ऐसा बैन लगा दिया है।
कौन-कौन प्रभावित होंगे?
इस फैसले से टेलीकॉम सेक्टर पर बड़ा असर पड़ सकता है। कई यूरोपीय देश अभी भी चीनी उपकरणों पर निर्भर हैं। उदाहरण के लिए, स्पेन ने पिछले साल Huawei के साथ 12 मिलियन यूरो का बोंड किया था। EU के प्रस्ताव के लागू होने के बाद ऐसे सप्लायर्स को नेटवर्क से हटाना होगा।
6G लॉन्चिंग और लागत पर असर
टेलीकॉम ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि चीनी उपकरणों को हटाने से 6G नेटवर्क की लॉन्चिंग में देरी हो सकती है और लागत बढ़ सकती है। वर्तमान में यूरोप में लगभग 90% सोलर पैनल चीन में बनते हैं, इसलिए वैकल्पिक सप्लायर्स की उपलब्धता पर भी ध्यान देना होगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा और विरोध
EU का यह कदम यूरोपीय उद्योगों में चीन की भागीदारी को कम करने की दिशा में उठाया गया है। प्रस्तावित मसौदा कानून पर यूरोपीय संसद और सदस्य देशों के बीच बातचीत होगी। चूंकि राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी सदस्य देशों की होती है, इसलिए कुछ देशों द्वारा विरोध की संभावना भी बनी हुई है।
अमेरिका का उदाहरण
यह कदम पहली बार नहीं उठाया जा रहा है। साल 2022 में अमेरिका ने भी Huawei, ZTE और अन्य चीनी कंपनियों के उपकरणों को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर प्रतिबंधित कर दिया था। अब यूरोप भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है।