
नोएडा। गुरुग्राम से लौटते समय कार बेसमेंट में गिरने से 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने नोएडा अथॉरिटी के बोर्ड रूम में तीन घंटे तक बैठक की। बैठक के बाद एसआईटी की टीम सीधे सेक्टर 150 के घटनास्थल का मुआयना करने निकली।
बैठक में डीएम मेधा रूपम और नोएडा पुलिस कमिश्नर भी मौजूद रहे। इस दौरान एसआईटी ने मृतक युवराज के पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के बयान दर्ज किए। एसआईटी ने यह भी नाराजगी जताई कि इतनी बड़ी घटना के बाद मौके पर कोई वरिष्ठ अधिकारी नहीं गया, जिससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित हुए।
शुक्रवार की रात युवराज मेहता की कार टूटी हुई बाउंड्री वॉल से पानी भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी थी। घने कोहरे के कारण युवराज को बाउंड्री वॉल दिखाई नहीं दी। हादसे के बाद उन्होंने अपने पिता को कॉल कर बुलाया, जिसके बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड और बचावकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे। युवराज करीब दो घंटे तक कार की छत से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उनकी मौत हो गई।
इस घटना से जनता में भारी आक्रोश है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है, जिसमें मेरठ के मंडलायुक्त, मेरठ जोन के एडीजी और पीडब्ल्यूजी के मुख्य अभियंता शामिल हैं। एसआईटी को पांच दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
एसआईटी अब यह भी जांच करेगी कि हादसे वाले क्षेत्र और सड़क की देखरेख किस विभाग के अधीन थी, जलभराव के बावजूद समय पर सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए और किन अधिकारियों की लापरवाही से यह दर्दनाक हादसा हुआ।