Tuesday, January 20

वैज्ञानिकों की नई खोज: दुनिया का पहला ‘थ्री-वे’ सूखा रोधी बाजरा RHB 273 कम बारिश वाले इलाकों में भी देगा भरपूर उपज और बेहतर पोषण

 

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जयपुर: राजस्थान के कम वर्षा वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए खुशखबरी है। राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (दुर्गापुरा) और अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) के सहयोग से दुनिया का पहला ‘थ्री-वे’ सूखा रोधी संकर बाजरा RHB 273 विकसित किया गया है। यह किस्म कम पानी में भी अधिक उपज और बेहतर पोषण देने में सक्षम है।

 

कम बारिश में 28 प्रतिशत तक अधिक उपज

वैज्ञानिकों के अनुसार आरएचबी 273 ने तीन वर्षों के परीक्षण में 22 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर अनाज उत्पादन दिया, जो पारंपरिक किस्मों की तुलना में 13 से 28 प्रतिशत अधिक है। फसल 75 से 76 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, जिससे किसानों का समय और संसाधन दोनों बचेंगे। यह संकर किस्म अनाज के साथ-साथ 48-50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उच्च गुणवत्ता वाला भूसा चारा भी उपलब्ध कराएगी।

 

अति-शुष्क क्षेत्रों के लिए अधिसूचित

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा देशभर में जारी 25 फसलों की 184 उन्नत किस्मों में आरएचबी 273 को राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के उन क्षेत्रों के लिए अधिसूचित किया गया है, जहाँ सालाना वर्षा 400 मिमी से कम होती है।

 

रोग प्रतिरोधक और पोषण में बेहतर

डॉ. एस. के. जैन ने बताया कि यह किस्म बाजरे की प्रमुख बीमारियों डाउनी मिल्ड्यू और ब्लास्ट के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधक है। स्वास्थ्य दृष्टिकोण से यह फसल महत्वपूर्ण है, जिसमें 10.5 प्रतिशत प्रोटीन, 44 पीपीएम आयरन और 37 पीपीएम जिंक पाया जाता है।

 

किसानों के लिए अतिरिक्त लाभ

आरएचबी 273 के पुष्पगुच्छों पर विशेष रेशे होने के कारण यह पक्षियों से नुकसान से भी सुरक्षित है। थ्री-वे हाइब्रिड होने के कारण इसकी बीज उत्पादन लागत कम रहेगी, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के लगभग 3 से 3.5 लाख हेक्टेयर कम वर्षा वाले क्षेत्र में इस किस्म से बाजरे की पैदावार राष्ट्रीय औसत से लगभग 35 प्रतिशत अधिक होने की संभावना है।

 

किसानों की राहत और क्षेत्रीय कृषि विकास

कम पानी और रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ पोषण से भरपूर यह किस्म राजस्थान के किसानों के लिए विशेष रूप से वरदान साबित होने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि आरएचबी 273 से मरुधरा के अति-शुष्क इलाकों में कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि आएगी और किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी।

 

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