Tuesday, January 20

सऊदी का पाकिस्तान, भारत का UAE: MBZ का दिल्ली आपात दौरा क्यों? ये हैं 5 बड़ी वजह

नई दिल्ली/अबू धाबी: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) का अचानक दिल्ली दौरा सिर्फ 3 घंटे का था, लेकिन इसके पीछे कई रणनीतिक और राजनीतिक संकेत छिपे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता और पाकिस्तान-सऊदी अरब के रक्षा गठबंधन के बीच UAE ने भारत के साथ गहरा रक्षा और रणनीतिक साझेदारी समझौता किया है।

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MBZ के दौरे के 5 प्रमुख कारण:

  1. रणनीतिक साझेदारी और ‘स्ट्रैटजिक फायरवॉल’
    MBZ का दौरा उस समय हुआ, जब ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा मंडरा रहा था, सऊदी अरब के साथ UAE के संबंध तनावपूर्ण हैं, और पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की इस्लामिक NATO बनाने की तैयारी में है। भारत के साथ यह रक्षा साझेदारी UAE के लिए स्थिरता और सुरक्षा का भरोसेमंद स्तंभ साबित होगी।
  2. भारत का भरोसेमंद मध्यस्थ और स्वतंत्र पार्टनर
    भारत की विदेश नीति ‘गुट निरपेक्ष’ रही है। अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध रखने वाला भारत, UAE के लिए विश्वसनीय और स्वतंत्र रणनीतिक पार्टनर है।
  3. सऊदी-पाकिस्तान डिफेंस समझौते का जवाब
    पिछले साल सऊदी और पाकिस्तान ने डिफेंस डील पर हस्ताक्षर किए, जिसमें एक देश पर हमला दूसरों पर हमला माना जाएगा। UAE, जिसने पाकिस्तान को भारी लोन दिया था, अब पाकिस्तान को सऊदी कैंप का देश मानता है। MBZ का दौरा इस स्थिति में भारत के साथ स्वतंत्र रक्षा साझेदारी का संकेत है।
  4. यमन और सोमालीलैंड में क्षेत्रीय टकराव
    सऊदी अरब और UAE के बीच यमन को लेकर तनाव बढ़ा है। दक्षिणी यमन में UAE समर्थित समूहों पर सऊदी के हवाई हमले ने UAE को भारत जैसे भरोसेमंद सहयोगी की तलाश करने पर मजबूर किया।
  5. डिफेंस और न्यूक्लियर एग्रीमेंट, और गाजा शांति प्लान
    PM मोदी और MBZ ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा, बड़े और छोटे परमाणु रिएक्टरों के संचालन और न्यूक्लियर ऊर्जा सहयोग पर भी चर्चा हुई। साथ ही, गाजा पीस प्लान में भारत और UAE की भूमिका इस क्षेत्र में कूटनीतिक प्रभाव और निवेश बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

पिछले दौरे और संपर्क:
अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और UAE के रक्षा मंत्री भी हाल ही में भारत का दौरा कर चुके हैं। जनवरी की शुरुआत में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के दौरे के दौरान उन्हें UAE लैंड फोर्सेज ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया था, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य रिश्ते का संकेत है।

इस दौरे ने स्पष्ट कर दिया कि भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी अब सिर्फ आर्थिक या डिफेंस तक सीमित नहीं, बल्कि मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में राजनीतिक, सैन्य और कूटनीतिक संतुलन बदलने वाला कदम है।

 

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