
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) के दिल्ली दौरे ने पाकिस्तान को चिंता में डाल दिया है। सिर्फ 2–3 घंटे के इस दौरे में भारत और UAE ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी सहित 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर करने पर सहमति जताई।
दौरे के दौरान रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा सुरक्षा, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और निवेश में कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। सबसे अहम था रणनीतिक रक्षा साझेदारी पर लेटर ऑफ इंटेंट, जो रक्षा निर्माण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और क्षमता विकास में करीबी सहयोग का संकेत देता है।
पाकिस्तान के लिए यह कदम चिंता का कारण बन गया है, खासकर उस समय जब सऊदी अरब और UAE के रिश्ते तनावपूर्ण हैं और सऊदी अरब, पाकिस्तान के साथ पिछले साल किए गए रक्षा समझौते के तहत इ슬ामिक NATO बनाने की योजना पर काम कर रहा है। पाकिस्तान ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और अपने विदेश मंत्री इशाक डार ने सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से फोन पर बातचीत की। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने इसे ‘ताजा डेवलपमेंट और आपसी हितों’ की बातचीत बताया, लेकिन विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान की बेचैनी और रणनीतिक झटका मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का विश्लेषण:
- अमेरिका के जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट डेरेक जे ग्रॉसमैन के अनुसार, पाकिस्तान को भारत-UAE की दोस्ती और रक्षा साझेदारी पसंद नहीं आई।
- पाकिस्तानी विशेषज्ञ अली मुस्तफा ने कहा कि UAE राष्ट्रपति का दौरा पाकिस्तान के लिए चिंताजनक है, क्योंकि इस साझेदारी से पाकिस्तान पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक पहुंच खो सकता है।
इस समझौते के तहत आतंकवाद, अपराधियों और फाइनेंसरों पर संयुक्त कार्रवाई पर भी सहमति बनी। भारत और UAE ने सीमा पार आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए भी सहयोग बढ़ाने की पुष्टि की।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-UAE रक्षा साझेदारी सिर्फ हथियार खरीदने–बेचने तक सीमित नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और संयुक्त विकास पर केंद्रित है। इससे भविष्य में दोनों देश साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय हथियार निर्माण और निर्यात में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
इस तरह, UAE राष्ट्रपति का दिल्ली दौरा पाकिस्तान के लिए एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक झटका साबित हुआ है और पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।