Tuesday, January 20

इंदौर में भिखारी नहीं, ‘लखपति’! सरकारी नौकरी वालों से भी ज्यादा कमाई, होटल और मकान में रहती है ठाठ

 

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इंदौर (एमपी): इंदौर में भिखारी सिर्फ भीख मांगने वाले नहीं, बल्कि कई लखपति भिखारी हैं, जो महीने की कमाई में आम सरकारी कर्मचारियों को पीछे छोड़ देते हैं। हाल ही में पकड़े गए भिखारी मांगीलाल ने भीख के पैसे से करोड़ों की संपत्ति बना ली है और सराफा व्यापारियों को कर्ज भी देता है।

 

भिखारी भी अब ‘प्रोफेशनल’

 

इंदौर में कुछ सालों से भिखारी पेशेवर बन गए हैं। दूसरे प्रदेशों से लोग भीख मांगने इंदौर आते हैं। अक्टूबर 2024 में प्रशासन ने 22 भिखारियों को पकड़ा, जो दिन में भीख मांगते और रात में होटल में ठहरते थे। इनमें 11 नाबालिग बच्चे भी शामिल थे।

 

भिखारी बनकर करोड़पति

 

मांगीलाल के पास इंदौर में दो मकान, एक कार और दो ऑटो हैं। कार चलाने के लिए ड्राइवर रखा है और ऑटो भाड़े पर चलते हैं। वह भीख के पैसे सराफा व्यापारियों को ब्याज पर देता है।

 

इंदौर में दिसंबर 2024 में पकड़ी गई महिला भिखारी की साप्ताहिक कमाई 75 हजार रुपए थी, यानी महीने में लगभग तीन लाख रुपए। इंद्रा नाम की महिला भिखारी के पास दो मंजिला मकान और प्लॉट था, साथ ही 20 हजार रुपए का स्मार्टफोन और बाइक भी थी।

 

अन्य शहरों में भी अमीर भिखारी

 

इंदौर के अलावा उज्जैन में नारायण दास साधु के पास दो पक्के मकान, कई प्लॉट और करीब डेढ़ करोड़ रुपए की एफडी पाई गई। भोपाल में भी गीता बाई नाम की भिखारी के पास जमीन, मकान, एफडी और सोने-चांदी के गहने थे।

 

अधिकारी भी चौंक गए

 

प्रशासन की टीम ने इनकी कमाई देखकर हैरानी जताई। सरकारी भिखारी मुक्त अभियान के बावजूद राजवाड़ा, सराफा, खजराना और 56 बाजार जैसी जगहों पर लखपति भिखारी आम जनता से भीख मांगते पाए गए।

 

निष्कर्ष:

 

इंदौर में भिखारी सिर्फ भीख नहीं मांग रहे, बल्कि इसे लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है। सरकार की कार्रवाई के बावजूद भी इस पेशेवर भीख मांगने की संस्कृति को रोक पाना मुश्किल साबित हो रहा है।

 

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