
नई दिल्ली: नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबने से मौत ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में डिजास्टर मैनेजमेंट सिस्टम की कमजोरियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली में किसी भी हादसे—चाहे डूबना हो, आग लगना हो, सड़क दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा—से निपटने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) सक्रिय है, लेकिन अंतर-विभागीय समन्वय की कमी और SDRF के गठन में देरी जैसी खामियां अभी भी मौजूद हैं।
दिल्ली का SOP कैसे काम करता है
किसी हादसे की सूचना 112 पर कॉल करने से शुरू होती है।
कॉल स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (EOC) को जाती है, जो संबंधित जिले के EOC तक पहुंचाती है।
हर जिले में 24 घंटे ड्यूटी पर प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर तैनात रहते हैं, जो सीधे SDM के अधीन काम करते हैं।
SDM घटना की सूचना जिले के DM को देता है। DM पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की मुख्य जिम्मेदारी संभालता है।
बड़े हादसे या संसाधन कम होने पर DM NDRF को बुलाकर मदद ले सकते हैं।
DM फायर विभाग और पुलिस के संसाधनों का भी इस्तेमाल करता है। भारी मशीनों और क्रेन की जरूरत भी DM प्रशासन द्वारा पूरी की जाती है।
नोएडा हादसे से मिली सीख
हादसे के शुरुआती मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। नोएडा की घटना में समय पर सही निर्णय लेने में कमी दिखाई दी, जिससे बचाव प्रभावी ढंग से नहीं हो पाया।
दिल्ली सिस्टम में प्रमुख कमियां
तालमेल का अभाव: अंतर-विभागीय समन्वय अभी भी कमजोर।
SDRF का गठन: स्टेट डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स सक्रिय नहीं।
जिला स्तर पर सक्रियता: जिला स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन तुरंत शुरू करने वाली टीम की कमी।
प्रशिक्षण की कमी: पानी या डूबने जैसी घटनाओं पर क्विक रिस्पॉन्स की पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं।
पूर्व हादसों की याद
यह हादसा जुलाई 2024 में राजेंद्र नगर के आईएएस कोचिंग सेंटर की बेसमेंट में बाढ़ में फंसे तीन छात्रों की मौत की याद भी ताजा करता है।
विशेषज्ञों की राय
राहगिरी फाउंडेशन की को-फाउंडर सारिका पांडा भट्ट का कहना है कि इंजीनियर की मौत रोड सेफ्टी की अनदेखी और बेसिक सुरक्षा मानकों की कमी के कारण हुई।
आर्किटेक्ट सुमित शर्मा ने बताया कि बचाव दल के पास पानी में उतरने और रेस्क्यू करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं था।
निष्कर्ष
नोएडा हादसा यह संदेश देता है कि दिल्ली-एनसीआर में डिजास्टर मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करना और SOP को प्रभावी बनाना बेहद जरूरी है। स्थायी रूप से SDRF का गठन, अंतर-विभागीय तालमेल और प्रशिक्षित क्विक रिस्पॉन्स टीम की मौजूदगी भविष्य में बड़े हादसों को रोकने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।