Tuesday, January 20

भारत-यूएई ट्रेड डील: एनर्जी, कृषि और निवेश में बड़ा समझौता, 2032 तक 200 अरब डॉलर का लक्ष्य

नई दिल्ली।
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने 2032 तक आपसी व्यापार को 200 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। यह समझौता ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा, अंतरिक्ष, कृषि निर्यात, निवेश और एडवांस्ड कंप्यूटिंग जैसे कई अहम क्षेत्रों में हुआ है।

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यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत की एक दिन की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के बाद यह डील हुई। विदेश सचिव विक्रम मिश्रा ने बताया कि यह लक्ष्य भारत और यूएई के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यूएई अब भारत को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लाई करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।

एनर्जी सेक्टर में अहम समझौता
ऊर्जा क्षेत्र में, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और ADNOC गैस के बीच 10 साल के लिए सेल्स एंड परचेज एग्रीमेंट हुआ। इसके तहत भारत को 2028 से लगातार LNG सप्लाई मिलेगी, जिससे वैश्विक गैस कीमतों के उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

ट्रेड, निवेश और औद्योगिक विकास
निवेश और व्यापार बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। गुजरात सरकार और यूएई के बीच ढोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन के विकास के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए गए। इसके साथ ही UAE का फर्स्ट अबू धाबी बैंक (FAB) और DP वर्ल्ड भारत के गिफ्ट सिटी में अपने कार्यालय और संचालन शुरू करेंगे। इससे भारत एक क्षेत्रीय वित्तीय और व्यापार सेवाओं का केंद्र बनने की दिशा में मजबूत होगा।

ढोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन क्या है
ढोलेरा में एक प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्र तैयार किया जाएगा। इसमें इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नया बंदरगाह, स्मार्ट शहरी टाउनशिप, रेलवे कनेक्टिविटी, ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर और विमानन प्रशिक्षण रखरखाव सुविधाएं शामिल हैं।

कृषि निर्यात में नई पहल
कृषि और प्रोसेस्ड फूड्स के क्षेत्र में APEDA और यूएई की Ministry of Climate Change and Environment के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता खाद्य सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर केंद्रित है। इसके जरिए भारतीय कृषि और प्रोसेस्ड फूड्स का खाड़ी देशों में बाजार और बढ़ाने की उम्मीद है।

इस समझौते से भारत-यूएई के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी और दोनों देशों के लिए साझा विकास और अवसरों का मार्ग खुला होगा।

 

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