Tuesday, January 20

रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर सिंह ब्रदर्स में फिर मची रार, 500 करोड़ रुपये का विवाद

नई दिल्ली।
देश की प्रमुख फार्मा कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर भाई शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस बार विवाद का केंद्र फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढाल चैरिटेबल सोसायटी और उससे जुड़ी 500 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी व सालाना 30 करोड़ रुपये के रेवेन्यू को लेकर है।

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झगड़े की जड़ें और पहले के विवाद
मालविंदर की पत्नी जापना सिंह का आरोप है कि शिविंदर और उनकी पत्नी अदिति सिंह ने फर्जी तरीके से उन्हें और अन्य सदस्यों को सोसायटी से बाहर कर दिया, ताकि अस्पताल और उसकी कमाई पर कब्जा किया जा सके।
सिंह बंधु पहले भी विवादों में रह चुके हैं। 2019 में जापानी कंपनी दाइची सांक्यो के केस में उन्हें अवमानना का दोषी पाया गया था। रैनबैक्सी डील के दौरान धोखाधड़ी के आरोपों के कारण इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने उन्हें 50 करोड़ डॉलर हर्जाना देने का आदेश दिया था।

सिंह ब्रदर्स का सफर: उतारचढ़ाव और दिवालियापन
सिंह बंधु कभी भारत के हेल्थकेयर सिस्टम पर मजबूत पकड़ रखते थे। 1937 में चचेरे भाइयों रणबीर और गुरबक्स ने दवाओं का व्यवसाय शुरू किया, जिसे बाद में मोहन सिंह को बेच दिया गया। परविंदर सिंह और उनके बाद उनके दोनों बेटे मालविंदर और शिविंदर ने रैनबैक्सी, फोर्टिस हेल्थकेयर और रेलिगेयर इंटरप्राइजेज में अपनी पहचान बनाई।
2008 में रैनबैक्सी की अपनी हिस्सेदारी बेचने और निवेशों में घाटा होने के कारण दोनों दिवालिया हो गए। उनके खिलाफ 13,000 करोड़ रुपये की देनदारी तय हुई, और उन्होंने फोर्टिस में हिस्सेदारी बेचनी पड़ी।

नवीन विवाद की बात
पुलिस के मुताबिक, जापना सिंह ने अक्टूबर 2025 में ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि मार्च 2025 में सोसायटी की बैठक दिखाकर उन्हें और अन्य सदस्यों को गलत तरीके से हटा दिया गया। इसके बदले अदिति की दादी, मां और भाई को सदस्यों में शामिल किया गया। ऐसा करके शिविंदर और अदिति ने सोसायटी और उसके अस्पताल पर पूरा नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की।

अदालत और जांच के आगे
विवाद गंभीर आर्थिक अपराधों से जुड़ा होने के कारण पुलिस और ईओडब्ल्यू मामले की जांच कर रही है। इस विवाद ने एक बार फिर सिंह बंधुओं की सत्ता और परिवारिक लड़ाई को उजागर कर दिया है, जो कभी भारत के हेल्थकेयर उद्योग में बड़ा नाम बन चुके थे।

इस मामले की सुनवाई और जांच आगे चल रही है, और आने वाले दिनों में इसका असर फोर्टिस राजन ढाल अस्पताल और संबंधित हितधारकों पर देखा जाएगा।

 

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